वाराणसी : बीएचयू में शिक्षण प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण के लिए नई योजना
—25 लाख रुपये या उससे अधिक लागत वाले प्रस्तावों को मिलेगी वित्तीय सहायता, 14 अगस्त तक आवेदन वाराणसी, 01 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) प्रशासन ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षण अवसंरचना को आध
प्रतीक


—25 लाख रुपये या उससे अधिक लागत वाले प्रस्तावों को मिलेगी वित्तीय सहायता, 14 अगस्त तक आवेदन

वाराणसी, 01 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) प्रशासन ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षण अवसंरचना को आधुनिक बनाने तथा विद्यार्थियों की अनुसंधान एवं नवाचार क्षमता को सशक्त करने के उद्देश्य से शिक्षण प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण एवं विकास के लिए नई वित्तीय सहायता योजना शुरू की है। इसके तहत नई प्रयोगशालाओं की स्थापना के साथ-साथ मौजूदा प्रयोगशालाओं के विस्तार, विविधीकरण और उन्नयन के लिए शिक्षकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।

—25 लाख रुपये से अधिक लागत वाले प्रस्तावों पर होगा विचार

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये अथवा उससे अधिक लागत वाले प्रस्तावों पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए विचार किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य प्रयोगशाला-आधारित शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना और विद्यार्थियों में अनुसंधान, नवाचार तथा व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देना है।

—विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित होंगी प्रयोगशालाएं

विश्वविद्यालय का प्रयास है कि जहां भी संभव हो, वहां प्रयोगशालाओं के पाठ्यक्रम और सुविधाओं को विश्व के अग्रणी शिक्षण संस्थानों के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। प्रस्तावों में विद्यार्थियों की दक्षता बढ़ाने, नवीन प्रयोगात्मक मॉड्यूल शामिल करने, प्रयोगशाला अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा पुराने प्रयोगों के स्थान पर समकालीन एवं पाठ्यक्रम आधारित प्रयोगों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

—शिक्षण, अनुसंधान और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस योजना के माध्यम से अनुभव-आधारित शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुसंधान क्षमताओं का विकास, अंतर्विषयी एवं बहुविषयी शिक्षा को प्रोत्साहन, व्यावसायिक कौशल में वृद्धि तथा विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला अवसंरचना के बेहतर उपयोग और साझा संसाधनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

—12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति करेगी प्रस्तावों का मूल्यांकन

प्रस्तावों के मूल्यांकन और प्रारंभिक चयन के लिए विज्ञान संस्थान स्थित सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर्स के प्रो. परिमल दास की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। प्रारंभिक रूप से चयनित आवेदकों को समिति के समक्ष अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों में विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक सहभागिता कर सकेंगे।

—14 अगस्त तक जमा होंगे प्रस्ताव

विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित की है। प्रारंभिक चयन की प्रक्रिया 21 अगस्त 2026 तक पूरी की जाएगी, जबकि चयनित प्रस्तावों की प्रस्तुतियां 29 अगस्त से 3 सितम्बर 2026 के बीच आयोजित होंगी। इसके बाद विशेषज्ञ समिति अपनी संस्तुतियां कुलपति को सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी