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जयपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। सरकारी भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बैठाकर लाखों रुपये की अवैध वसूली करने वाले संगठित परीक्षा चीटिंग गिरोह के खिलाफ राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे 10 हजार रुपये के इनामी आरोपित दिलखुश मीणा (30) को गिरफ्तार किया है। आरोपित सरकारी भर्ती परीक्षाओं में वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडिडेट बैठाने के लिए बिचौलिये (दलाल) की भूमिका निभाता था और इसके एवज में लाखों रुपये का अवैध लेन-देन करवाता था।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) विशाल बंसल ने बताया कि पुलिस थाना एसओजी में दर्ज प्रकरण के तहत आरोपित दिलखुश मीणा निवासी राजगढ़ जिला अलवर को गिरफ्तार किया गया। आरोपित लंबे समय से फरार था और उसकी गिरफ्तारी पर एसओजी ने 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
जांच के अनुसार कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) नई दिल्ली द्वारा 15 जुलाई 2018 को आयोजित संयुक्त हायर सेकेंडरी लेवल (सीएचएसएल) परीक्षा-2017 (द्वितीय चरण) में संगठित गिरोह ने वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर डमी अभ्यर्थियों (मुन्नाभाई) को परीक्षा केंद्रों पर बैठाकर प्रश्न-पत्र हल करवाए। इसके बदले गिरोह के सदस्यों ने अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की अवैध वसूली की।
एसओजी की जांच में सामने आया कि दिलखुश मीणा पूरे गिरोह में मध्यस्थ (दलाल) के रूप में सक्रिय था। उसने आरोपित चेतराम मीणा को सुशील कुमार मीणा के लिए डमी अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशाल चौधरी से संपर्क स्थापित कराया था। इसी कड़ी में वह असली अभ्यर्थियों और गिरोह के सदस्यों के बीच समन्वय कर अवैध धनराशि के लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।
इस मामले में एसओजी पहले ही प्रमोद कुमार यादव, अवनीश कुमार उर्फ मोनू, चेतराम मीणा, विनय कुमार सिंह और सुनील कुमार मीणा सहित कुल 10 आरोपिताें को गिरफ्तार कर चुकी है। दिलखुश मीणा की गिरफ्तारी को इस संगठित परीक्षा चीटिंग गिरोह के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपित से एसओजी की टीम गहन पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश