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कोलकाता, 06 जुलाई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी कर्मचारियों का एक नया संगठन अस्तित्व में आया है। इस संगठन का नाम 'राष्ट्रीय कर्मचारी सेवा भारती' रखा गया है। संगठन का दावा है कि सरकारी कर्मचारियों को राष्ट्रवादी सोच से प्रेरित कर मजबूत राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के उद्देश्य से इसकी शुरुआत की गई है।
हाल ही में कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में संगठन का औपचारिक शुभारंभ किया गया। संगठन की वेबसाइट भी शुरू कर दी गई है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से इस संगठन को औपचारिक मान्यता नहीं नहीं मिली है, लेकिन कार्यक्रम में भाजपा के नेताओं और आरएसएस के स्वयंसेवकों की मौजूदगी रही।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सौमित्र राय ने बताया कि संगठन के पंजीकरण के लिए सोसाइटी एक्ट के तहत आवेदन किया गया है। उन्होंने दावा किया कि वेबसाइट के माध्यम से अब तक लगभग डेढ़ लाख सरकारी और अर्द्धसरकारी कर्मचारियों ने संगठन से जुड़ने की इच्छा जताई है। प्रत्येक जिले में एक जिला प्रमुख नियुक्त किया गया है और जल्द ही सभी जिलों में समितियों का गठन किया जाएगा।
वाम मोर्चा सरकार के समय सरकारी कर्मचारियों का प्रमुख संगठन को-ऑर्डिनेशन कमिटी था, जबकि दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े कर्मचारियों का संगठन पश्चिम बंग कर्मचारी फेडरेशन था। सत्ता परिवर्तन के बाद कर्मचारियों के लिए नए संगठनों को लेकर चर्चा तेज है। राज्य सरकारी कर्मचारी कल्याण संघ और सरकारी कर्मचारी परिषद, पश्चिम बंगाल जैसे संगठनों के नाम भी सामने आ रहे हैं।
सरकारी कर्मचारी परिषद, पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष देबाशीष शील ने रविवार को बताया कि वर्ष 2015 में भाजपा नेता राहुल सिन्हा के संरक्षण में इस संगठन की स्थापना की गई थी। उनका कहना है कि भाजपा किसी कर्मचारी संगठन को आधिकारिक मान्यता नहीं देती और उनके संगठन को भी भाजपा का आधिकारिक संगठन घोषित नहीं किया गया है।
इस बीच, 28 जून को कोलकाता के महामायातला जय हिंद स्टेडियम में राष्ट्रीय कर्मचारी सेवा भारती का औपचारिक शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक प्रलय तलापात्र सहित अन्य लोग मौजूद थे।
सौमित्र राय ने कहा कि संगठन अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, सेवा और राष्ट्र निर्माण के चार मूल सिद्धांतों पर कार्य करेगा। उनका कहना है कि यदि सरकारी कर्मचारी पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन स्थापित करें तथा नौकरी को सेवा के रूप में देखें, तो समाज का व्यापक कल्याण संभव होगा। कर्मचारियों की समस्याओं को भी प्रशासन के समक्ष संवाद के माध्यम से उठाया जाएगा, ताकि आंदोलन की आवश्यकता न पड़े।
उन्होंने बताया कि संगठन से जुड़ने वाले कर्मचारियों को पहले संघ के परिचय वर्ग और प्रशिक्षण वर्ग से जोड़ा जाएगा। प्रशिक्षण के बाद ही उन्हें सदस्यता दी जाएगी। संगठन तनावमुक्त जीवन के लिए ध्यान और योग का प्रशिक्षण भी देगा।
सौमित्र राय स्वयं पश्चिम मेदिनीपुर के मेदिनीपुर शहर के निवासी हैं और ग्राम पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश सचिव भी हैं।
वहीं, को-ऑर्डिनेशन कमिटी के वरिष्ठ नेता गंगाधर बर्मन ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से ऐसे संगठन की चर्चा सुनने को मिल रही है। हालांकि अभी तक इस संगठन के सार्वजनिक रूप से सक्रिय होने की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता