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झाड़ग्राम, 06 जुलाई (हि. स.)। हरियाली से आच्छादित पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरे जंगलमहल क्षेत्र में एक बार फिर पारंपरिक उत्सव की रौनक लौट आई। कानाईसोर पहाड़ पूजा की ख्याति अब केवल झाड़ग्राम तक सीमित नहीं रही। आषाढ़ के तीसरे शनिवार से शुरू होने वाले तीन दिवसीय उत्सव और मेले में पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड, बिहार और ओडिशा से भी लाखों श्रद्धालु, पर्यटक और दर्शक पहुंचते हैं। इसके चलते कानाईसोर पहाड़ क्षेत्र चार राज्यों के मिलन स्थल में तब्दील हो जाता है।
लोक परंपरा के अनुसार प्रकृति को प्रसन्न रखने तथा प्राकृतिक आपदाओं से क्षेत्र की रक्षा की कामना के साथ बेलपहाड़ी की ऐतिहासिक कानाईसोर पहाड़ पूजा इस वर्ष भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रविवार देर शाम संपन्न हो गई, मेला सोमवार तक चलेगा। पर्वत को देवस्वरूप मानकर की जाने वाली इस अनूठी पूजा को लेकर झाड़ग्राम के बेलपहाड़ी से सटे सीमावर्ती क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, वर्षों पहले जंगलमहल में इस पर्व की शुरुआत हुई थी। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पर्वत की पूजा करने से प्रकृति संतुलित रहती है और क्षेत्र सूखा, बाढ़ सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहता है। इसी विश्वास के साथ प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह के तीसरे शनिवार को इस पूजा का आयोजन किया जाता है। वर्षा ऋतु की शुरुआत में होने वाला यह आयोजन अब बेलपहाड़ी क्षेत्र के सबसे बड़े लोक उत्सवों में शामिल हो चुका है। वनस्थलों में मेला लग जाता है। विभिन्न जनजातीय समाज एकत्र होकर अपनी-अपनी संस्कृति के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।
पहाड़ की तलहटी में विशाल मेले का आयोजन किया गया, जहां विभिन्न प्रकार की दुकानें, लोक संस्कृति की झलक और प्राकृतिक सौंदर्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। पूरे वर्ष झाड़ग्राम की हरियाली और जंगल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, लेकिन पहाड़ पूजा के अवसर पर यहां आने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कानाईसोर पहाड़ की चोटी तक पहुंचने के लिए पक्की सीढ़ियों का निर्माण कार्य जारी है। प्रशासन की ओर से बताया गया कि कुछ कार्य अभी शेष है, जिसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वर्षभर पर्यटकों के लिए पहाड़ पर चढ़ना अधिक आसान और सुरक्षित होगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उत्सव के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बेलपहाड़ी थाना के प्रभारी स्वरूप मुखर्जी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। पुलिस पूरे आयोजन के दौरान लगातार निगरानी रखने के साथ-साथ भारी भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
प्रशासन की सतर्कता के कारण तीन दिवसीय उत्सव और मेला सोमवार को शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न होने की उम्मीद है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता