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शिमला, 27 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारी हितैषी है, तो आज प्रदेशभर के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर क्यों हैं।
उन्होंने कहा कि पेंशनर्स और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी अपनी लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों के धरना स्थल पर पहुंचे, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय आधे-अधूरे आश्वासनों से उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया।
नेता प्रतिपक्ष ने सोमवार को एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान कर्मचारियों द्वारा नारेबाजी किया जाना इस बात का संकेत है कि उन्हें सरकार की घोषणाओं पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री केवल वादे और घोषणाएं कर रहे हैं, जबकि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए कर्मचारियों की मांगों का गंभीरता से समाधान करना चाहिए।
जयराम ठाकुर ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए सख्त कानूनी प्रावधानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों के लिए 10 वर्ष तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, दो महीने के भीतर जांच पूरी करने तथा तीन महीने के भीतर ट्रायल समाप्त करने का प्रावधान किया गया है, ताकि दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके और युवाओं का परीक्षा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल के दौरान पेपर लीक के अनेक मामले सामने आए, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी पेपर लीक मामलों में गंभीर आरोप लगने और जांच की संस्तुति होने के बावजूद राज्य सरकार ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पदोन्नति देकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला