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नैनीताल, 27 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी उप जिला चिकित्सालय में संयुक्त निदेशक ग्रेड पर तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोनिका जोशी खर्कवाल की तबादला याचिका पर सुनवाई करते हुए स्थानांतरण आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण सेवा की एक अनिवार्यता है और याचिकाकर्ता पिछले आठ वर्षों से लगातार हल्द्वानी में सेवा दे रही थीं, जिसके चलते उनका तबादला अवैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि डॉ. मोनिका का तबादला नैनीताल शहर में किया गया है और उनके पति जो बाल रोग विशेषज्ञ हैं उनका तबादला भी 'स्पौस पॉलिसी' के तहत नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में किया गया है। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कहा है कि वे 24 घंटे के भीतर ईमेल के माध्यम से संबंधित सचिव को अपना प्रत्यावेदन भेज सकती हैं, जिस पर वे एक सप्ताह के भीतर कानूनन निर्णय लेगें। कोर्ट ने कहा कि आगामी दस दिनों तक याचिकाकर्ता की पोस्टिंग के संबंध में यथास्थिति बहाल रहेगी। लेकिन यदि याचिकाकर्ता निर्धारित 24 घंटे के भीतर अपना प्रत्यावेदन देने में विफल रहती हैं, तो वे इस आदेश के तहत मिलने वाले किसी भी संरक्षण या राहत की हकदार नहीं होंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता