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नैनीताल, 27 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक प्राथमिक शिक्षक की शिकायत पर पारित आदेश का अनुपालन नहीं करने के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने सचिव को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता देव कुमार जैन ने अवमानना याचिका में कहा है कि वह राजकीय प्राथमिक विद्यालय पिण्डकी में सहायक अध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक है। याचिका में कहा कि आंगनबाडी केंद्रों में पंजीकृत छात्र छात्राओं के दाखिले में दो-दो जगह नाम दर्ज किए हैं, वित्तीय अनियमितता और छात्रवृति के मामलें में हुई अनियमितता के बारे में उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया। जांच सही पाए जाने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय विभागीय साठगांठ से याचिकाकर्ता का आर्थिक, मानसिक और समाजिक तौर पर उत्पीड़न करना शुरू किया गया। यही नहीं उनका वेतन भी रोक दिया गया।
अवमानना याचिका में कहा कि उनके द्वारा अपने उत्पीड़न के खिलाफ वर्ष 2019 मे राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज की। लेकिन 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी शिकायत का निराकरण नही हुआ। जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने फरवरी 2026 में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए आयोग से कहा था कि दो माह के भीतर उनकी शिकायत का निस्तारण करें। लेकिन दो माह के बजाय कई माह बीत गए लेकिन ना तो उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई हुई और ना ही कोर्ट के आदेश का अनुपालन किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता