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नई दिल्ली, 27 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों की सजा की अवधि पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों की फांसी की सजा की मांग की। एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने सजा की अवधि पर 31 जुलाई को फैसला सुनाने का आदेश दिया।
कोर्ट ने 13 जुलाई को पाचों को दोषी करार देते हुए इस मामले के छह आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इस मामले में ताहिर हुसैन के अलावा जिन आरोपितों को दोषी करार दिया था, उनमें नाजिम, कासिम, अनस और जावेद शामिल हैं। कोर्ट ने जिन आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया उनमें हसीन ऊर्फ मुल्लाजी ऊर्फ सलमान, समीर खान, फिरोज, गुल्फाम, शोएब आलम ऊर्फ बॉबी और मुंतजिम ऊर्फ मुसा शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 3 जून 2020 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में कहा गया कि 24 और 25 फरवरी 2020 को ताहिर हुसैन ने अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद से भीड़ का नेतृत्व किया और उसे सांप्रदायिक रुप दिया। चार्जशीट में कहा गया था कि अंकित शर्मा हत्या के लिए साजिश रची गई थी। अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के नेतृत्व में भीड़ ने खास रुप से टारगेट किया। खजूरी खास इलाके में ताहिर हुसैन के घर के बाहर वारदात हुई। शर्मा की हत्या के बाद भीड़ ने एक नाले में शव फेंक दिया।
पुलिस के मुताबिक कुछ लोग शव नाले में फेंक रहे थे। अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने पाया था कि तेज धार वाले हथियार से 51 वार के निशान हैं। ताहिर ने ही चांद बाग इलाके में भीड़ को उकसाया। चार्जशीट में ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बताया गया है। दिल्ली पुलिस ने अंकित के पिता के बयान पर ताहिर हुसैन के खिलाफ केस दर्ज किया है।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह