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नई दिल्ली, 27 जुलाई (हि.स.)। इंस्टाग्राम पर आकर्षक ज्वेलरी विज्ञापन डालकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले साइबर गिरोह के एक सदस्य को मध्य जिला की साइबर थाना पुलिस ने हरियाणा के पलवल से गिरफ्तार किया है। आरोपित ने अपने साथियों के साथ मिलकर दिल्ली की एक महिला से ज्वेलरी बेचने के नाम पर 1.16 लाख रुपये की ठगी की थी। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को बैंक खातों में रखने के बजाय दो अलग-अलग कोटक महिंद्रा बैंक के क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने में इस्तेमाल किया गया, ताकि मनी ट्रेल छिपाई जा सके। पुलिस अब फरार आरोपी शमीम और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने सोमवार को बताया कि 15 फरवरी को साइबर थाने में एक महिला ने शिकायत दी थी। महिला ने बताया कि उसने इंस्टाग्राम पर ज्वेलरी का विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल की, लेकिन कॉल नहीं लगी। कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ज्वेलरी विक्रेता का प्रतिनिधि बताया और फिर व्हाट्सएप पर बातचीत शुरू कर दी।
आरोपित ने महिला का भरोसा जीतकर ज्वेलरी भेजने का झांसा दिया। महिला ने 14 फरवरी को अलग-अलग यूपीआई और पेटीएम ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 1,16,975 रुपये ट्रांसफर कर दिए। भुगतान के बाद न तो ज्वेलरी मिली और न ही आरोपितों ने संपर्क किया।
इसके बाद महिला को ठगी का एहसास हुआ और उसने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
डिजिटल और बैंकिंग ट्रेल से खुला राज
मामले की जांच के लिए एसआई दीपक, हेड कांस्टेबल संदीप कुमार, हेड कांस्टेबल परमवीर और महिला कांस्टेबल मेघा की टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि ठगी की रकम में से 97,580 रुपये एक कोटक महिंद्रा बैंक के क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने में इस्तेमाल हुए, जबकि 19,395 रुपये गुजरात निवासी जाफरू के नाम पर जारी दूसरे क्रेडिट कार्ड में जमा किए गए। आगे की जांच में खुलासा हुआ कि इनमें से एक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अंकित ठाकुर (26) कर रहा था। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हरियाणा के पलवल जिले के होडल में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में बल्लभगढ़ निवासी 35 वर्षीय एक महिला को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत बाउंड डाउन किया गया है।
पूछताछ में अंकित ने बताया कि वह क्रेडिट कार्ड से जुड़े सिम का इस्तेमाल ओटीपी प्राप्त करने और फर्जी ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने के लिए करता था। इसके बदले वह संबंधित महिला को 5 से 10 हजार रुपये देता था। उसने यह भी कबूल किया कि ठगी की रकम का इस्तेमाल करने के बाद पैसा अपने साथी शमीम को सौंप देता था। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 10 प्रतिशत हिस्सा अंकित को मिलता था, जबकि 90 प्रतिशत रकम शमीम अपने पास रखता था।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस के अनुसार, गिरोह पहले इंस्टाग्राम पर भारी छूट वाले फर्जी ज्वेलरी विज्ञापन पोस्ट करता था। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर कॉल करने पर कॉल जानबूझकर रिसीव नहीं की जाती थी। कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल कर खुद को ज्वेलरी कंपनी का प्रतिनिधि बताया जाता था। इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए बातचीत कर पीड़ित का विश्वास जीता जाता और ऑनलाइन भुगतान करा लिया जाता था। रकम मिलते ही उसे तुरंत दूसरे लोगों के क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने में इस्तेमाल कर मनी ट्रेल छिपा दी जाती थी। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन, एक सक्रिय जियो सिम और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस अब फरार आरोपित शमीम की तलाश के साथ-साथ पूरे साइबर ठगी नेटवर्क, अन्य लाभार्थियों और इसी तरीके से ठगे गए दूसरे पीड़ितों का पता लगाने में जुटी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी