मोह ही पाप का मूल कारण, ‘मैं और मेरा’ का भाव छोड़ें: आचार्य सागरचन्द्र सागरजी
मंदसौर, 24 जुलाई (हि.स.)। मनुष्य के जीवन में होने वाले अधिकांश पापकर्मों का मूल कारण राग और मोह है। यदि व्यक्ति मोह का त्याग कर दे तो वह स्वतः ही अनेक प्रकार के पापकर्मों से बच सकता है। यह विचार शुक्रवार को मध्‍य प्रदेश के मंदसौर शहर में आचार्य श्र

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