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पश्चिम बर्दवान, 21 जुलाई (हि.स.)।
करीब 15 वर्षों बाद मंगलवार को कांग्रेस ने कोलकाता के ऐतिहासिक शहीद मीनार मैदान में शहीद समागम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। आसनसोल और दुर्गापुर से भी सैकड़ों कार्यकर्ता ट्रेन, बस और निजी वाहनों से कोलकाता पहुंचे। पार्टी ने इस आयोजन को शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ अपने राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी पेश किया।
कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस नेता शाह आलम ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह समागम पूरी तरह शहीदों को समर्पित है और इसमें किसी तरह का मनोरंजन या दिखावा नहीं होगा। उन्होंने कहा, यहां न पगलू डांस होगा और न ही डीम-भात। यह कार्यक्रम केवल शहीदों को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया है।
शाह आलम ने दावा किया कि करीब डेढ़ दशक तक कांग्रेस को शहीद मीनार मैदान में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं मिली, जिसके कारण पार्टी को अपने कार्यालयों में ही शहीद दिवस मनाना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने विपक्ष की लोकतांत्रिक गतिविधियों पर लगातार रोक लगाने का काम किया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए गए।
उन्होंने 21 जुलाई 1993 के गोलीकांड का मुद्दा भी उठाया और मांग की कि घटना से जुड़ी आयोग की रिपोर्ट को फिर से सार्वजनिक किया जाए। साथ ही उस समय के अधिकारी मनीष गुप्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग दोहराई।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शहीद समागम केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर जनता के बीच संदेश देने का भी मंच है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को पार्टी ने अपने जनाधार और संगठनात्मक मजबूती का संकेत बताया।
राजनीतिक हलकों में इस कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि 15 वर्षों बाद शहीद मीनार मैदान में कांग्रेस की वापसी और राज्यभर से कार्यकर्ताओं की भागीदारी आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा