गंभीर रक्तस्त्राव से जूझ रही प्रसूता की एमजीएच में मौत, 30 यूनिट ब्लड भी नहीं बचा सका जान
गंभीर रक्तस्त्राव से जूझ रही प्रसूता की एमजीएच में मौत, 30 यूनिट ब्लड भी नहीं बचा सका जान नॉर्मल डिलीवरी के बाद नहीं रूक रही थी ब्लीडिंग, उम्मेद अस्पताल से किया गया था रेफर जोधपुर, 20 जुलाई (हि.स.)। कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा के बाद अब जोधपुर में भ
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गंभीर रक्तस्त्राव से जूझ रही प्रसूता की एमजीएच में मौत, 30 यूनिट ब्लड भी नहीं बचा सका जान

नॉर्मल डिलीवरी के बाद नहीं रूक रही थी ब्लीडिंग, उम्मेद अस्पताल से किया गया था रेफर

जोधपुर, 20 जुलाई (हि.स.)। कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा के बाद अब जोधपुर में भी एक प्रसूता की मौत हो गई। प्रसव के बाद गंभीर रक्तस्त्राव से जूझ रही एक प्रसूता ने रविवार देर रात महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। महिला की 24 जून को तिंवरी हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद खून नहीं रुका तो उसे उम्मेद हॉस्पिटल रेफर किया गया था। वहां से उसे महात्मा गांधी हॉस्पिटल में रेफर किया गया था, जहां वह वेंटिलेटर पर थी और लगातार डायलिसिस चल रहा था। वहीं जबकि सात गंभीर प्रसूताएं अभी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में भर्ती हैं। इसमें पांच प्रसूताओं का उम्मेद और दो का महात्मा गांधी अस्पताल में उपचार चल रहा है।

एमजीएच के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने बताया कि तिंवरी क्षेत्र निवासी प्रसूता समू गत 24 जून को उम्मेद अस्पताल में भर्ती हुई थी। उसकी तिंवरी में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। उसने बच्ची को जन्म दिया था। डिलीवरी के बाद उसका खून रुकना बंद नहीं हुआ। इस पर उसे जोधपुर रेफर किया गया। महिला को उम्मेद हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, तब तक उसका काफी खून बह चुका था। उसकी बच्चेदानी से लगातार खून बह रहा था। इस कारण बच्चेदानी को निकाला गया था। उसे ब्लड, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स चढ़ाए गए। खून की कमी के चलते उसकी किडनी डैमेज हो गई। तबीयत में सुधार नहीं होने पर उसे 27 जून को महात्मा गांधी हॉस्पिटल रेफर किया गया था।

एमजीएच के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह के अनुसार, अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला को हाइपोवॉलेमिक शॉक लगा था। इस गंभीर स्थिति में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती। महिला के शरीर में रक्त की भारी कमी को पूरा करने के लिए डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किए। इलाज के दौरान उसे 6 यूनिट ब्लड, 14 यूनिट प्लाज्मा और 10 यूनिट क्रायोप्रिसिपिटेट चढ़ाए गए। हालांकि, खून की अत्यधिक कमी के कारण उसकी किडनी डैमेज हो चुकी थी। 14 जुलाई से उसे उल्टियां होने लगीं और उसकी तबीयत फिर बिगडऩे लगी, जिसके बाद रविवार देर रात उसने दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि यहां उम्मेद अस्पताल से रेफर की गई दो प्रसूताएं भी भर्ती हैं, जिनका विशेषज्ञ डॉक्टर्स की निगरानी में उपचार चल रहा है। एमजीएच में गलत ब्लड ग्रुप का खून जिस प्रसूता को चढ़ाया था, वह भी भर्ती है।

उम्मेद अस्पताल में भी अभी पांच प्रसूताएं भर्ती हैं, जिनकी हालत डिलीवरी के बाद अत्याधिक रक्तस्त्राव के चलते गंभीर हुई थी। जबकि एक माह में 16 प्रसूताओं की तबीयत खराब हुई है। इनमें पांच अभी उम्मेद अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टर इस बात को लेकर भी परेशान हैं कि आखिरकार अत्यधिक रक्तस्त्राव क्यों हो रहा है। इसको लेकर एसओपी का भी पालन करने की बात कही जा रही है। फिलहाल, एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस जोधा जो खुद एक गायनेकोलॉजिस्ट हैं, वे भी सभी मामलों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

पावटा जिला अस्पताल में गत माह आठ प्रसूताओं की सिजेरियन के बाद अचानक तबीयत खराब हो गई थी, लेकिन समय रहते उनको उपचार दिया गया, जिससे वे धीरे-धीरे ठीक होकर घर गईं। इनमें दो को एम्स रेफर करना पड़ा था, जहां कई दिनों तक उनका उपचार चला था। बता दे कि जोधपुर में पिछले एक महीने में 16 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी है। इनमें से ज्यादातर प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। एक प्रसूता धापू की तबीयत गलत खून चढ़ाने की वजह से 13 जुलाई को उम्मेद हॉस्पिटल में बिगड़ी थी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश