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कानपुर, 20 जुलाई (हि.स.)। सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत विकास का भी महत्वपूर्ण आधार है। यह बातें सोमवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की डीन (इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्टार्टअप) एवं निदेशक (सस्टेनेबिलिटी) डॉ. शिल्पा देश पांडेय कायस्थ ने कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ द्वारा गीता अनुरागी फाउंडेशन और विवेकानंद स्टडी सर्किल, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में क्लाइमेट विदिन: लीगल फ्रंटियर्स ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड बियॉन्ड विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ हुआ। स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ की निदेशक डॉ. स्मृति रॉय ने स्वागत भाषण देते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. शिल्पा देशपांडेय कायस्थ ने कहा कि विश्वविद्यालय युवाओं में नेतृत्व क्षमता, नवाचार, टीमवर्क और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सतत विकास की अवधारणा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास से भी जुड़ी हुई है।
कार्यक्रम की अतिथि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज एवं एलएलआरएच अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा वर्मा ने जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि लगातार चार माह तक अपने घर में उपयोग हुए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और विभिन्न उत्पादों के रैपर एकत्र करने पर उन्हें यह महसूस हुआ कि एक परिवार से ही बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। ऐसे में देशभर में प्लास्टिक अपशिष्ट की मात्रा और उसके दुष्प्रभावों का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया।
गीता अनुरागी फाउंडेशन के अध्यक्ष नागेंद्र मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण धरती को आया बुखार शीर्षक पर आधारित नाटक रहा, जिसमें जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट के दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद आयोजित प्रस्तुतीकरण एवं संवाद सत्र में पर्यावरणीय कानूनों, उनके प्रभावी क्रियान्वयन, जनभागीदारी तथा युवाओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा स्वच्छ, हरित और जिम्मेदार समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप