वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, 22 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट
वाराणसी, 20 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) और आसपास के जनपदों में रिमझिम बारिश के बीच सदानीरा गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही तेज वर्षा का असर अब काशी में भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवा
राजघाट पुल से गंगा नदी में बढ़े जलस्तर का नजारा


गंगा में बढ़ाव का नजारा


वाराणसी, 20 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) और आसपास के जनपदों में रिमझिम बारिश के बीच सदानीरा गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही तेज वर्षा का असर अब काशी में भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को गंगा की उफनती लहरें दशाश्वमेध घाट स्थित गंगा सेवा निधि के आरती मंच (प्लेटफॉर्म) तक पहुंच गईं। वहीं, घाटों की निचली सीढ़ियों (मढ़ियों) पर बने छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं, जिनमें स्थापित भगवान शिव, हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी डूब गई हैं।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार ,सोमवार सुबह आठ बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 60.88 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया। गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर तथा खतरे का निशान 71.262 मीटर निर्धारित है। वर्तमान में जलस्तर चेतावनी बिंदु से काफी नीचे है, लेकिन पिछले तीन दिनों में इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। शुक्रवार को जलस्तर 60.53 मीटर, शनिवार को 60.67 मीटर, रविवार को 60.77 मीटर और सोमवार सुबह छह बजे तक 60.88 मीटर रिकॉर्ड किया गया। हालांकि फिलहाल जलस्तर स्थिर है, लेकिन मौसम विभाग द्वारा 20 से 22 जुलाई तक वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल में भारी वर्षा की चेतावनी जारी किए जाने से तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। सोमवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यदि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार वर्षा होती रही तो गंगा के जलस्तर में और तेजी से वृद्धि की आशंका है। केंद्रीय जल आयोग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

गंगा किनारे अहिल्याबाई घाट क्षेत्र में रहने वाले नियमित गंगा स्नानार्थी संतोष पांडेय और दिनेश अग्रहरि ने बताया कि आषाढ़ और सावन के दौरान बारिश तथा बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण हर वर्ष बाढ़ जैसी स्थिति बनती है। तटवर्ती क्षेत्रों के लोग इसके लिए पहले से तैयारी करते हैं, फिर भी बाढ़ की आशंका बनी रहती है। उनका कहना है कि जब गंगा रौद्र रूप धारण करती हैं तो श्रद्धालु उनकी आराधना कर स्थिति सामान्य होने की प्रार्थना करते हैं। बाढ़ के कारण स्थानीय व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है, लेकिन जीवन की रफ्तार फिर भी चलती रहती है।

जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन लगातार लोगों से गंगा के किनारे अनावश्यक रूप से न जाने और सतर्कता बरतने की अपील कर रहा है। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत शिविरों सहित अन्य आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। जल पुलिस और संबंधित विभागों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर उसकी सहायक नदी वरुणा पर भी दिखाई देने लगा है। वरुणा का पानी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समीप तक पहुंच गया है। हालांकि इसमें सीवर का पानी अधिक होने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदी में जलकुंभी हटाने का कार्य मशीनों की सहायता से लगातार किया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी