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कानपुर, 20 जुलाई (हि.स.)। मशरूम उत्पादन युवाओं और महिलाओं के लिए कम लागत में स्वरोजगार का बेहतर माध्यम है तथा इससे आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है। यह बातें सोमवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मशरूम उत्पादन केंद्र के प्रशिक्षण प्रभारी एवं पादप रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश श्रीवास्तव ने कहीं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मशरूम उत्पादन केंद्र में छह दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। लगातार वर्षा के बावजूद पहले दिन इकतीस प्रशिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।
डॉ. मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि मशरूम उत्पादन एक लाभदायक कृषि उद्यम है, जिसमें कम लागत और कम स्थान में बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम की विभिन्न प्रजातियों, कम्पोस्ट तैयार करने, बीज बोने, फसल के रखरखाव, कटाई तथा विपणन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए कौशल प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास के माध्यम से गरीबी उन्मूलन और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
प्रशिक्षण के दौरान टीचिंग एसोसिएट शिवानी चौधरी ने प्रतिभागियों को वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की विधि और उसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप