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पश्चिमी सिंहभूम, 20 जुलाई (हि.स.)। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड स्थित पांडुकी गांव में सोमवार को हो समाज की आस्था के प्रमुख केंद्र देशाउली (बोंगा-बुरु पूजा स्थल) का पारंपरिक विधि-विधान और रीति-रिवाज के साथ शुद्धिकरण (जाते-परचि) किया गया।
इस अवसर पर पूरे गांव ने एकजुट होकर न केवल धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया, बल्कि सामूहिक श्रमदान से देशाउली की बांस की घेराबंदी कर उसके संरक्षण और पवित्रता बनाए रखने का संकल्प भी लिया। आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि गांव के प्रत्येक परिवार ने स्वेच्छा से एक-एक बांस दान कर धार्मिक स्थल की सुरक्षा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
गांव के दिउरी और सहयोगी दिउरियों के नेतृत्व में संपन्न हुए इस अनुष्ठान में मानकी, मुंडा, बुजुर्ग, युवा और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पूजा-अर्चना के बाद आयोजित सभा में आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने कहा कि देशाउली केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि हो समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इसकी रक्षा करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहें।
सभा के दौरान ग्रामीणों ने देशाउली परिसर में बाहरी लोगों के अनावश्यक प्रवेश और नशीले पदार्थों के सेवन जैसी गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की। युवा महासभा के जिला अध्यक्ष शेरसिंह बिरुवा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक आस्था और सामाजिक मर्यादा के विपरीत हैं। उन्होंने सभी लोगों से धार्मिक स्थलों का सम्मान करने और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने में सहयोग करने की अपील की।
ग्रामीणों ने यह भी निर्णय लिया कि देशाउली परिसर की नियमित साफ-सफाई और देखरेख सामूहिक रूप से की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर इस पवित्र स्थल की सुरक्षा के लिए प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा।
इस अवसर पर पांडुकी ग्राम के दिउरी जाम्बिरा बिरुवा (उर्फ भोले), मानकी-मुंडा संघ के केंद्रीय अध्यक्ष गणेश पाट पिंगुवा, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पूर्व अध्यक्ष भूषण पाट पिंगुवा, महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम, प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द बिरुवा, जिला सचिव ओयबन हेम्ब्रम, नंदलाल पिंगुवा, मनीष बिरुवा, प्रदीप बिरुवा, मुंडा बिरुवा, हरीश बिरुवा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक