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कानपुर, 20 जुलाई (हि.स.)। ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में आईआईटी कानपुर का यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह बातें सोमवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहीं। उन्हाेंने बताया कि उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में ग्रीन हाइड्रोजन पर नवाचार एवं एकीकृत ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र उत्कृष्टता केंद्र (ईकोजेन) की स्थापना की जाएगी। इस प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश सरकार की अधिकृत समिति से स्वीकृति मिलने के बाद उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) ने भी मंजूरी प्रदान कर दी है।
प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने बताया कि उत्कृष्टता केंद्र का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से लेकर भंडारण, परिवहन, उपयोग और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण तक बहुविषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही राज्य के शून्य-प्रदूषण (नेट-जीरो) लक्ष्य को हासिल करने में भी यह केंद्र अहम भूमिका निभाएगा।
इस परियोजना के तहत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की लागत कम करने, स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को विकसित करने और उद्योगों के साथ मिलकर नई तकनीकों के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ देश में हरित ऊर्जा के उपयोग को भी गति मिलने की उम्मीद है।
इस उत्कृष्टता केंद्र का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सतत ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर प्रबोध बाजपेयी प्रधान अन्वेषक के रूप में करेंगे। परियोजना से जुड़े सभी अन्वेषकों को बहुविषयक अनुसंधान एवं विकास का व्यापक अनुभव है और उनका विभिन्न अग्रणी औद्योगिक संस्थानों के साथ सहयोग भी स्थापित है। संस्थान का मानना है कि इस साझेदारी से ग्रीन हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका और मजबूत होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप