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मंडी, 20 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के चंबा के तीसा विद्यालय के बच्चों की ओर से मेले के दौरान दी गई नाट्य प्रस्तुति को लेकर की जा रही कार्रवाई को राजपूत महासभा ने अनुचित करार दिया। राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष ई. केएस जमवाल ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चंबा के तीसा के एक विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सामाजिक मेले में प्रस्तुत किए गए नाटक को लेकर कुछ शरारती तत्वों ने जाति विशेष की आड़ लेकर संविधान विरोधी करार देकर विवाद पैदा करना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्कूल के बच्चों ने सामाजिक व्यवस्था पर चोट करते हुए अपनी अभिव्यक्ति दी है। लेकिन इस मुद्दे को एससी एसटी कमीशन में ले जाकर संविधान विरोधी कहना सोची समझी साजिश है। जिसका राजपूत महासभा और सामान्य वर्ग पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी कमीशन की ओर से डीसी एवं एसपी चंबा से जांच कर रिपोर्ट तलब की है। इस सिलसिले में राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश, के प्रदेशाध्यक्ष ई.के.एस.जम्वाल, डाॅ.अमर सिंह गुलेरिया, प्रधान श्री राजपूत सभा जिला मंडी ने सरकार से अनुरोध किया कि वह इस मामले में किसी भी प्रकार की अनुचित कार्रवाई करने से परहेज करे।
उन्होंने कहा कि उक्त नाट्य प्रस्तुति समाज में प्रचलित आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को दर्शाने का एक रचनात्मक प्रयास था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक विषयों पर विचार व्यक्त करना तथा नाटक, साहित्य और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों से जन-जागरूकता फैलाना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
इस मुददे को लेकर कुछ जाति विशेष के लोगों द्वारा अप्रासंगिक तर्क देकर स्कूल प्रबंधन एवंम शिक्षकों पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जोकि बहुत ही निंदनीय है। उन्होंने कहा कि राजपूत महासभा का मत है कि विद्यार्थियों, अध्यापकों और विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न केवल अनुचित होगी बल्कि इससे शैक्षणिक और रचनात्मक वातावरण भी प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग समाज में समय-समय पर इस प्रकार की प्रस्तुतियों, संगोष्ठियों और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उन मुद्दों को रखता रहा है। आगे भी इसे जारी रखेगा। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य किसी वर्ग या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद को बढ़ावा देना होता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि विद्यार्थियों, अध्यापकों अथवा विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध कोई अन्यायपूर्ण कार्रवाई की जाती है, तो राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश में आने वाले समय में धरने-प्रदर्शन करेगी। इसके पश्चात राजपूत महासभा ने उपायुक्त के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, शिक्षामंत्री रोहित ठाकुर को ज्ञापन भेजा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा