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रायगढ़ ,20 जुलाई (हिस )। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं जिलेभर में इको-फ्रेंडली बीज राखियां तैयार कर रही हैं। सोमवार को जिला कलेक्टोरेट परिसर में बिहान की दीदियों ने अपने हाथों से निर्मित बीज राखियों का आकर्षक स्टॉल लगाया।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्टॉल का अवसमूह की महिलाओं से राखियां खरीदीं तथा नगद भुगतान भी किया। साथ ही उन्होंने उनके नवाचार और पर्यावरण संरक्षण की इस पहल की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में बीज राखियां खरीदकर महिलाओं के प्रयासों को प्रोत्साहित किया।
जिले के सभी सातों विकासखंडों में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं बरबट्टी, मक्का, लौकी, करेला, सेमी, कुम्हड़ा, ग्वारफली, भिंडी, उड़द, मसूर, मूंगफली, धान एवं अन्य स्थानीय बीजों तथा अनाज से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। फेवीकॉल, रंग, स्टीकर और धागे की सहायता से बनाई गई इन राखियों की विशेषता यह है कि उपयोग के बाद इन्हें मिट्टी में दबाने पर इनमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकते हैं। इस प्रकार ये राखियां केवल भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश भी देती हैं। कम लागत, आकर्षक डिजाइन और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इन बीज राखियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कोयलार की जय ठाकुर देव स्व-सहायता समूह की सदस्य एवं बिहान में वीसी सखी के रुप में कार्यरत श्रीमती गणपति राठिया ने धान, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबट्टी के बीजों से आकर्षक बीज राखियां तैयार की हैं। उनकी यह पहल अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। इसी प्रकार रायगढ़ विकासखंड के बैसपाली (नंदेली सीएलएफ), जुनवानी ग्राम संगठन, लोइंग क्लस्टर, गोपालपुर एवं संबलपुरी सीएलएफ, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव की जननी स्व-सहायता समूह, घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा की गायत्री स्व-सहायता समूह तथा पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिलेभर की महिलाएं पूरे उत्साह के साथ पर्यावरण मित्र बीज राखियां तैयार कर रही हैं। गांव-गांव में आयोजित समूह बैठकों में भी इस अभियान को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
सखी सहेली क्लस्टर की उपाध्यक्ष अनिता महंत ने बताया कि बीज राखी बनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है। प्लास्टिक की राखियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए बिहान से जुड़ी दीदियों ने विभिन्न घरेलू बीजों से राखियां तैयार की हैं। नारी विकास संकुल संगठन की बीआरपी रितु बंजारे ने बताया कि बीज राखियों में चना, तिल, उड़द, अरहर, सरसों, पालक और लाल भाजी जैसे बीजों का उपयोग किया गया है। राखी कहीं भी गिरने पर मिट्टी में मिलकर पौधे का रूप ले सकती है, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।
विजेता महिलाओं को 27 जुलाई को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर वे कलेक्टर सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने हाथों से बीज राखी बांधेंगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा। यह पहल रक्षाबंधन को केवल एक पारंपरिक पर्व तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे प्रकृति संरक्षण के जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करती है। बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अपने नवाचार और रचनात्मकता के माध्यम से यह संदेश दे रही हैं कि यदि प्रत्येक त्योहार को पर्यावरण से जोड़ा जाए, तो सामाजिक परंपराओं के साथ-साथ हरियाली और सतत विकास की दिशा में भी बड़ा बदलाव संभव है।
हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान