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मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों से बैठक
राजस्व शिकायतों की निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाएं
चंडीगढ़, 19 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जिलों में आयोजित किए जा रहे साप्ताहिक समाधान शिविरों में तहसीलदारों तथा राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि मौके पर ही राजस्व से जुड़ी समस्याओं का समाधान संभव हो सके।
मुख्यमंत्री ने रविवार को चंडीगढ़ में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए डिजिटल गवर्नेंस, भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण तथा नागरिक-केंद्रित सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त,डीएमसी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि राज्य के 99 प्रतिशत गांवों के नक्शों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 60 लाख ततीमा नक्शों को अद्यतन किया गया है तथा रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (अधिकार अभिलेख) का लगभग 60 प्रतिशत मानकीकरण किया जा चुका है।
बैठक में बताया गया कि नागरिक-केंद्रित सुधारों के तहत 6,761 गांवों में संपत्ति कार्ड तैयार कर लगभग 25.16 लाख संपत्ति मालिकों को वितरित किए जा चुके हैं। लगभग 95 प्रतिशत गांवों के नक्शे भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। पारदर्शिता एवं प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए लगभग 42 लाख आधार नंबर पुराने राजस्व अभिलेखों से जोड़े जा चुके हैं तथा नागरिकों की सुविधा के लिए आईटी हेल्पडेस्क भी स्थापित किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने पांच लाख से अधिक लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों का निपटारा किया है। सरल पोर्टल की लगभग 80 प्रतिशत सेवाओं को ऑटो अपील प्रणाली से जोड़ा जा चुका है ताकि निर्धारित समय से अधिक लंबित मामलों का स्वत: उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके और सेवाओं का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित हो। डिजिटल पंजीकरण सुधारों से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह हो पाया है।
मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि कागज रहित दस्तावेज पंजीकरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज पंजीकरण की प्रक्रिया अब पूर्णत: एंड-टू-एंड पेपरलेस हो चुकी है तथा लंबित मामलों की निगरानी के लिए सार्वजनिक लाइव डैशबोर्ड भी उपलब्ध है।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विभाग ने मई 2025 में अपना पहला इन-हाउस सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग स्थापित कर व्यापक डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से लगभग 44 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया जा चुका है, जबकि राज्य की भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) संरचना को मजबूत करने के लिए 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (सीओआरएस) स्थापित किए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा