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मंडी, 19 जुलाई (हि.स.)। मंडी जिला के विकास खंड गोपालपुर के खनोट गांव निवासी प्रगतिशील किसान सुनील कुमार सफलता की नई मिसाल बन गए हैं। प्राकृतिक खेती के माध्यम से वे अपनी लगभग दो बीघा भूमि पर नकदी एवं पारंपरिक फसलों का उत्पादन कर प्रतिवर्ष डेढ़ से दो लाख रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं।
सुनील बताते हैं कि वे वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इस विधा को अपनाने के बाद उनकी खेती की लागत में कमी आई है, रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद हो गया है तथा मिट्टी की उर्वरता में लगातार सुधार हुआ है। विभाग की ओर से उन्हें देसी गाय की खरीद, गौशाला के फर्श के पक्कीकरण तथा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक उपकरण एवं ड्रम जैसी सुविधाएं तथा अन्य तकनीकी सहयोग भी मिला है।
सुनील कुमार ने पिछले वर्ष पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती भी शुरू की। उन्होंने पौधों पर लगभग 10 से 15 हजार रुपए का निवेश किया, जिससे उन्हें 60 से 70 हजार रुपए की आय हुई। वर्तमान में वे कद्दू, खीरा, लौकी, करेला के अलावा भिंडी, टमाटर, शिमला मिर्च, अदरक, अरबी, जिमीकंद, मक्का तथा गेहूं की प्राकृतिक खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध करवा रही है। योजना के अंतर्गत देसी गाय की खरीद के लिए अधिकतम 25 हजार रुपए तथा परिवहन व्यय के लिए 5 हजार रुपए की सहायता प्रदान की जाती है। गौशाला का फर्श पक्का करने के लिए 8 हजार रुपए तक तथा 200 लीटर क्षमता के प्लास्टिक ड्रम की खरीद पर 750 रुपए की सब्सिडी भी दी जाती है, ताकि जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक घटकों का निर्माण आसानी से किया जा सके।
सुनील कुमार का कहना है कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन रसायनमुक्त होता है तथा किसानों और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। कीटनाशकों के स्थान पर गोमूत्र आधारित प्राकृतिक घोल का उपयोग करने से पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा