ऑस्ट्रेलिया के डार्विन में बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध 'पिच ब्लैक' सोमवार से, भारत के वायु योद्धा शामिल होंगे
ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स बेस डार्विन में सोमवार से द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास 'पिच ब्लैक' शुरू करेगी, जो 7 अगस्त तक चलेगा। इस अभ्यास का नाम उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल निर्जन क्षेत्रों में रात्रि उड़ान विशेष अभियान के कारण रखा गया है।
हवा में ईंधन भरने का प्रदर्शन (फाइल फोटो)

- भारत की टुकड़ी मल्टीरोल लड़ाकू राफेल विमान के साथ हवा में ईंधन भरने का प्रदर्शन करेगी

नई दिल्ली, 19 जुलाई (हि.स.)। ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स बेस डार्विन में सोमवार से द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास 'पिच ब्लैक' शुरू करेगी, जो 7 अगस्त तक चलेगा। इस अभ्यास का नाम उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल निर्जन क्षेत्रों में रात्रि उड़ान विशेष अभियान के कारण रखा गया है। इसमें भारत, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, जापान, यूके और मेजबान ऑस्ट्रेलिया समेत 19 से अधिक सहयोगी देश शामिल होंगे। भारत की टुकड़ी मल्टीरोल लड़ाकू राफेल विमान का संचालन करेगी, जिसे सी-17 ग्लोबमास्टर-III और आईएल-78 वायु-से-वायु ईंधन भरने वाले विमानों का समर्थन प्राप्त होगा।

भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, नियंत्रक और अन्य विशेषज्ञ सहित उच्च कुशल वायु योद्धा शामिल होंगे। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को अंतरसंचालनीयता बढ़ाने, बल एकीकरण को मजबूत करने और वैश्विक परिदृश्यों में सहयोगात्मक संचालन की दिशा में परिचालन सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने करेगा। यह अभ्यास 'पिच ब्लैक' लंबी दूरी पर अभियान संबंधी हवाई अभियानों को परखने, बहुराष्ट्रीय अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पेशेवर साझेदारियों को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा।

यह अभ्यास विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी, समन्वय और जटिल हवाई युद्ध परिदृश्यों में युद्धाभ्यास का प्रशिक्षण देना है। इस अभ्यास का नाम 'पिच ब्लैक' (पूर्ण अंधेरा) इसलिए रखा गया है, क्योंकि इसका मुख्य फोकस रात के समय उड़ान भरने और अंधेरे में आक्रामक व रक्षात्मक अभियानों के अभ्यास पर होता है। यह अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं को एक वास्तविक और चुनौतीपूर्ण बहुराष्ट्रीय वातावरण में संचालन करने में सक्षम बनाएगा, जिससे परिचालन समन्वय और आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय वायु सेना ने इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में इस अभ्यास में भाग लिया है, जो रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम