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जींद, 19 जुलाई (हि.स.)। रानी तालाब पर रविवार को कई छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों व आमजन ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने के विरोध में अंबेडकर चौक रानी तालाब पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व जन संघर्ष मोर्चा हरियाणा राज्य कमेटी सदस्य सुधीर, ज्ञान विज्ञान समिति के जिलाध्यख सोहनदास ने संयुक्त रूप से किया।
प्रदर्शन से पहले रानी तालाब पार्क में ही रोष सभा का आयोजन किया गया। सभा में भाजपा सरकार द्वारा जनवादी अधिकारों के दमन की कड़े शब्दों में निंदा की। पेपर लीक व परीक्षाओं में धांधली को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे व परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर दिल्ली पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक व अन्य छात्रों को रविवार सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन बलपूर्वक उठाया जाना न सिर्फ लोकतांत्रिक हकों पर हमला है बल्कि यह मोदी सरकार की तानाशाही पूर्ण कार्रवाई है।
एसएफआई के राज्यध्यक्ष अक्षय, भारत की नौजवान सभा के जसपाल ने कहा कि एनईपी-2020 नई शिक्षा नीति के जरिये मोदी सरकार युवाओं में वैज्ञानिक चिंतन के सभी रास्ते बंद कर देना चाहती है।
असल में मोदी सरकार शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों से डरती है। 20 जुलाई को संसद मार्च की कॉल, चारों ओर से बढ़ रहे जन समर्थन और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों में बढ़ रहे गुस्से को सरकार पुलिस दमन के जरिये दबाना चाहती है। छात्र नेहा, ज्योति, विशाल, राहुल, समीर आदि ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक को जबरन उठाए जाने व प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस दमन का विरोध करते हुए मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त किया जाए, सोनम वांगचुक व प्रदर्शनकारी छात्रों की तमाम मांगे तुरंत पूरी की जाएं, शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस दमन बंद किया जाए, परीक्षाओं के संचालन में अक्षम एनटीए को तुरंत भंग किया जाए, एनईपी-2020 को निरस्त किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा