बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से,अनुपूरक बजट होगा पेश
पटना, 19 जुलाई (हि.स.)। बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होगा। 24 जुलाई तक चलने वाले इस सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं। सम्राट चौधरी सरकार के 100 द
बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से,अनुपूरक बजट होगा पेश


पटना, 19 जुलाई (हि.स.)। बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होगा। 24 जुलाई तक चलने वाले इस सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं। सम्राट चौधरी सरकार के 100 दिन पूरे होने के करीब होने के कारण भी यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विपक्ष ने हाल के घटनाक्रमों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। विशेष रूप से चर्चित 'हाफ एनकाउंटर' और पुलिस की गोली से भरत तिवारी की मौत के मामले को विपक्ष प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई और जनसरोकार से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया जा सकता है।

सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान इन मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार से जवाबदेही की मांग करेगा, वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के आरोपों का जवाब विकास कार्यों और उपलब्धियों के आधार पर देने की तैयारी में है। सरकार सड़क, बिजली, जल संसाधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और महिला सशक्तिकरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों का ब्यौरा सदन के पटल पर रख सकेगी।

मानसून सत्र के दौरान वित्त मंत्री विजेंद्र यादव वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का प्रथम अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। सरकार इस बजट के माध्यम से विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों को मंजूरी दिलाने का प्रयास करेगी।

सत्र के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 जुलाई को गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा होगी। 22 और 23 जुलाई को सरकारी विधेयक सदन में प्रस्तुत किए जाएंगे, जबकि 24 जुलाई को वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा के बाद सरकार विनियोग विधेयक पारित कराने का प्रयास करेगी।

सत्र के पहले दिन को छोड़कर शेष चार दिनों में प्रश्नकाल का आयोजन होगा, जिसमें विधायक विभिन्न विभागों से जुड़े प्रश्न उठाएंगे। संबंधित विभागों के मंत्री इन प्रश्नों का उत्तर देंगे। सरकार का प्रयास रहेगा कि विधायी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं, जबकि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में यह मानसून सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति और जनसरोकारों को सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी