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जबलपुर, 17 जुलाई (हि.स.)। दुर्गावती नगर तिलहरी निवासी आठ माह के मासूम शिवांग चौधरी के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और आयुष्मान भारत योजना जीवनदायिनी साबित हुई है। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित शिवांग का मुंबई स्थित नारायणा हृदयालय में सफल ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
सीएम्एचओ ने शुक्रवार को बताया कि शिवांग की नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने उसके हृदय संबंधी रोग की पहचान की। आरबीएसके के चिकित्सक डॉ.विकास झारिया और डॉ.गौतमी चौधरी द्वारा किए गए परीक्षण में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं सिविल सर्जन डॉ.नवीन कोठारी के मार्गदर्शन में आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कराई गईं। स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से शिवांग का आयुष्मान भारत योजना में तत्काल पंजीयन कराया गया, जिससे उसे निशुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त हुई।
इसके बाद बच्चे को विशेष उपचार के लिए मुंबई स्थित नारायणा हृदयालय रेफर किया गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने 8 जुलाई 2026 को उसकी सफल हृदय सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति संतोषजनक बताई है और वर्तमान में उसकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।
सफल उपचार के बाद शिवांग के परिवार में खुशी का माहौल है। पिता भरत चौधरी सहित परिजनों ने मध्यप्रदेश शासन, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नारायणा हृदयालय की चिकित्सकीय टीम तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। परिवार का कहना है कि समय पर बीमारी की पहचान और सरकारी योजनाओं के सहयोग के बिना उपचार कराना उनके लिए संभव नहीं था।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह प्रकरण राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है। बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान से जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। विभाग का मानना है कि विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के समन्वित प्रयासों से न केवल एक मासूम को नया जीवन मिला है, बल्कि आमजन का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक