भारत में धर्म और राजनीति को अलग क्यों नहीं देखा गया?
दीपक कुमार द्विवेदी
आज के बौद्धिक विमर्शों में एक विचार बार-बार सुनाई देता है, वह है- राज्य का कोई धर्म नहीं होना चाहिए। धर्म व्यक्ति का निजी विषय है और राजनीति को उससे अलग रखा जाना चाहिए। यह अवधारणा आधुनिक लोकतांत्रिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्स
Invalid email address
संपर्क करें
हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी न्यूज एजेंसी एम-6, भगत सिंह मार्केट, गोल मार्केट, नई दिल्ली- 110001