भारतीय धावकों ने कहा- 'कॉमनवेल्थ गेम्स एशियन गेम्स से ज्यादा कठिन'
नई दिल्ली, 14 जुलाई (हि.स.)। भारत के शीर्ष 400 मीटर धावकों का मानना है कि आगामी ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स उनके लिए एशियन गेम्स की तुलना में कहीं बड़ी चुनौती होगा। उनका कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों के विश्वस्तरीय ए
भारतीय धावक विशाल टी. के. (फाइल फोटो)


नई दिल्ली, 14 जुलाई (हि.स.)। भारत के शीर्ष 400 मीटर धावकों का मानना है कि आगामी ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स उनके लिए एशियन गेम्स की तुलना में कहीं बड़ी चुनौती होगा। उनका कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों के विश्वस्तरीय एथलीटों की मौजूदगी प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा कर देती है, जो बाद में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी के लिए भी अहम साबित होगी।

भारत ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में 32 सदस्यीय ट्रैक एवं फील्ड दल उतारेगा। इससे पहले 41 एथलीटों और 19 कोच व सपोर्ट स्टाफ सहित 60 सदस्यीय भारतीय दल सरकारी सहायता प्राप्त प्रशिक्षण शिविर के लिए पोलैंड के स्पाला रवाना हुआ है।

पुरुष 400 मीटर और मिश्रित 4x400 मीटर रिले में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले विशाल थेन्नारासु कायलविझी ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला बेहद कठिन होगा।

उन्होंने कहा, कॉमनवेल्थ गेम्स एक महासागर की तरह है। यहां पदक जीतना असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ दोनों बड़े मंच हैं, लेकिन कॉमनवेल्थ में प्रतिस्पर्धा का स्तर ज्यादा ऊंचा होता है। मैं इसे खुद को साबित करने का बड़ा अवसर मानता हूं।

22 वर्षीय विशाल ने पिछले महीने रांची में फेडरेशन कप में 44.98 सेकंड का समय निकालकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने विश्व रिले प्रतियोगिता में पुरुष 4x400 मीटर रिले में 3:00.32 मिनट का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया। उनका लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स में दोनों स्पर्धाओं में नया व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना है।

भारतीय धावकों का दावा आंकड़ों से भी मजबूत होता है। 2023 एशियन गेम्स में पुरुष 400 मीटर का स्वर्ण 45.55 सेकंड के समय के साथ जीता गया था, जबकि 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में जाम्बिया के मुजाला सामुकोंगा ने 44.66 सेकंड में स्वर्ण जीतकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। यानी कॉमनवेल्थ में पदक जीतने के लिए कहीं अधिक तेज दौड़ना पड़ता है।

400 मीटर धावक जय कुमार का मानना है कि कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के बीच कम समय होने से दोनों प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा।

उन्होंने कहा, मेरा मुख्य लक्ष्य एशियन गेम्स है। कॉमनवेल्थ में 400 मीटर की दौड़ आमतौर पर 43 से 45 सेकंड के बीच पूरी होती है, जबकि हाल के वर्षों में एशियन गेम्स में विजेता का समय 45 सेकंड से ऊपर रहा है। इसी वजह से कॉमनवेल्थ अधिक कठिन माना जाता है।

2025 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता धर्मवीर चौधरी ने कहा कि जमैका के कोच जेसन डॉसन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण से उनके प्रदर्शन में बड़ा सुधार आया है।

धर्मवीर ने बताया, पिछले साल मेरा सर्वश्रेष्ठ समय 46.6 सेकंड था, लेकिन अब मैं 45.6 सेकंड तक पहुंच चुका हूं। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और भारतीय खेल प्राधिकरण ने मुझ पर भरोसा बनाए रखा, जिसके लिए मैं आभारी हूं। उम्मीद है कि एशियन गेम्स में देश को गर्व महसूस कराने वाला प्रदर्शन करूंगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय