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नैनीताल, 13 जुलाई (हि.स.)। उच्च न्यायालय ने पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. छवि चौधरी की देहरादून से टिहरी जिले में स्थानांतरण किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि स्थानांतरण से छूट पाने के लिए उन्होंने यह गलत दावा किया कि कैंसर से पीड़ित उनकी सास नहीं बल्कि उनकी मां हैं ताकि वे उत्तराखंड लोक सेवक वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के चिकित्सा छूट प्रावधान का लाभ ले सकें। कोर्ट ने कहा कि यह जानबूझकर किया गया भ्रामक प्रस्तुतीकरण उनकी याचिका खारिज करने का अहम आधार बना।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. छवि चौधरी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि उनकी सास का एम्स ऋषिकेश में कैंसर का उपचार चल रहा है, इसलिए उनके स्थानांतरण आदेश को रद्द किया जाए। उन्होंने स्वयं को सास की एकमात्र देखभाल करने वाली बताया और कहा कि इस आधार पर उन्हें स्थानांतरण अधिनियम की धारा-तीन एफ के तहत छूट मिलनी चाहिए। यह प्रावधान उन लोक सेवकों को राहत देता है, जिन्हें गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारजन की देखभाल करनी होती है लेकिन अधिनियम में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण के अनुसार परिवार की परिभाषा केवल कर्मचारी के पति या पत्नी, 18 वर्ष तक के बच्चों और माता-पिता तक सीमित है, जिसमें सास-ससुर को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता देहरादून में आठ वर्ष से अधिक समय से तैनात थीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता