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नई दिल्ली, 13 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय के वकील जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के उच्च न्यायालय प्रशासन के फैसले के खिलाफ कल यानि 14 जुलाई को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की सोमवार को हुई आपात बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया।
उच्च न्यायालय प्रशासन ने दिल्ली की जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से उच्च न्यायालय के वकीलों पर काफी असर पड़ेगा और उनके पास केस में 70 फीसदी की कमी हो सकती है।
पिछले हफ्ते उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने वित्तीय क्षेत्राधिकार पर बनी सात जजों की कमेटी की रिपोर्ट को फुल कोर्ट के समक्ष रखने से रोकने की मांग खारिज कर दी थी। इस कमेटी ने जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ करने की सिफारिश की थी, जिसे फुल कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी।
इसके पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने 25 मई को वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव के विरोध में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था।
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने से उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के प्रैक्टिस औऱ उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। इसका न्याय वितरण प्रणाली पर काफी गहरा असर होगा।
इसके पहले दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकीलों ने इसी सवाल को लेकर 14 मई को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था। जिला अदालतों में न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का आह्वान ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने किया था।
ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने दिल्ली की जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर बीस करोड़ करने की मांग की थी। इस मांग पर को-आर्डिनेशन कमेटी की उच्च न्यायालय प्रशासन से बात भी हुई थी जिसके बाद उन्होंने 14 मई के बाद आगे न्यायिक कार्यों के बहिष्कार को खत्म कर दिया था। अब इस सवाल पर वकीलों के दोनों संगठन आमने-सामने हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह