अध्यात्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक : सपन कुमार मुखर्जी
प्रयागराज, 07 जून (हि.स.)। अध्यात्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं। सनातन परंपराओं, व्रतों, त्योहारों और पूजा-पद्धतियों का जितना आध्यात्मिक महत्व है, उतना ही वैज्ञानिक आधार भी है। यह बातें रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप)काशी प्रां
विहिप प्रशिक्षण शिविर का छाया चित्र


विहिप प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं का छाया चित्र


प्रयागराज, 07 जून (हि.स.)। अध्यात्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं। सनातन परंपराओं, व्रतों, त्योहारों और पूजा-पद्धतियों का जितना आध्यात्मिक महत्व है, उतना ही वैज्ञानिक आधार भी है। यह बातें रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप)काशी प्रांत के परिषद शिक्षा वर्ग में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केन्द्रीय सह मंत्री सपन कुमार मुखर्जी ने कही।

उन्होंने कहा कि आज हिंदू समाज को उसकी जड़ों से काटने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यालयों में कलावा और तिलक पर रोक जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं। सहिष्णुता के नाम पर होने वाले धर्मांतरण को हिंदू समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत चरित्र किसी व्यक्ति की ईमानदारी, नैतिक मूल्यों और व्यवहार से परिलक्षित होता है, जबकि राष्ट्रीय चरित्र समाज की सामूहिक चेतना, राष्ट्रभक्ति और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन से दिखाई देता है।

सपन कुमार मुखर्जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के हित में कार्य करना चाहिए। नियमित अध्यात्म, ज्ञान और योग मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। विज्ञान जहां भौतिक ब्रह्मांड के सत्य की खोज करता है, वहीं अध्यात्म आत्म-अवलोकन और चेतना के माध्यम से सत्य तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में सनातन संस्कृति के प्रति जिज्ञासा बढ़ रही है और लोग इसे समझने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि वे सनातन विचारों और सांस्कृतिक मूल्यों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का कार्य करें।

कार्यक्रम में काशी प्रांत संगठन मंत्री नितिन भारत ने कहा कि संगठन की बैठकें चरित्र निर्माण, शारीरिक एवं मानसिक अनुशासन, राष्ट्रभक्ति तथा सामाजिक समरसता की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। संगठित और सशक्त हिंदू समाज का निर्माण विहिप का प्रमुख लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि हिंदू जीवन मूल्यों की रक्षा, प्रवासी हिंदुओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखना तथा विभिन्न मत, पंथ और संप्रदायों के लोगों को सामाजिक समरसता के सूत्र में बांधना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है। सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंच बनाना भी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

नितिन भारत ने बताया कि काशी प्रांत में एकल विद्यालय, गौशाला, सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र, संस्कार शालाएं, निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं तथा नर्सिंग प्रशिक्षण जैसे अनेक सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। विभिन्न बस्तियों में संस्कार शालाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण रोकने के लिए भी संगठन लगातार कार्य कर रहा है।

कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण वर्ग में क्षेत्र सत्संग प्रमुख दिवाकर नाथ त्रिपाठी, प्रांत मंत्री डॉ. राज नारायण सिंह, प्रांत सह मंत्री प्रभृति कांत, प्रांत उपाध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, मुख्य शिक्षक बृजभूषण महेश सिंह, प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख आद्याशंकर मिश्र, विभाग संगठन मंत्री अंशुमान, शुभांगी सिंह, डॉ. दीपा यादव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल