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न्यू जर्सी, 07 जून (हि.स.)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ किसी भी संभावित शांति समझौते से पहले अमेरिका न तो तेहरान की फ्रीज की हुई संपत्ति जारी करेगा और न ही उस पर लगाए गए प्रतिबंधों में कोई राहत देगा। उन्होंने कहा कि किसी समझौते के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद ही ऐसे कदमों पर विचार किया जा सकता है।
एक टेलीविजन साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान सकारात्मक रवैया अपनाता है और समझौते की दिशा में आगे बढ़ता है, तभी आगे की बातचीत और संभावित रियायतों का रास्ता खुलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी अल्पकालिक समझौते के लिए लेबनान को अनिवार्य शर्त के रूप में शामिल नहीं कर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन पिछले कई सप्ताह से ईरान के साथ संभावित शांति व्यवस्था पर बातचीत की कोशिश कर रहा है। हालांकि राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य विकल्प भी अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बने हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अमेरिका कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान से जुड़े संघर्ष क्षेत्र में मौजूद लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिकों को फिलहाल वापस बुलाने की कोई योजना नहीं है। उनके अनुसार, जब तक अभियान अपने निर्धारित उद्देश्यों तक नहीं पहुंच जाता, तब तक सैनिकों की तैनाती जारी रहेगी। ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के पास दुनिया की सबसे मजबूत रक्षा और आक्रामक सैन्य शक्ति है।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि वह अपने पूर्ववर्ती की तुलना में अधिक व्यावहारिक और तर्कसंगत हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि हालिया संघर्ष के दौरान घायल होने के बाद खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। हालांकि उनके ठिकाने के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार किया।
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हाल के सैन्य घटनाक्रमों के बावजूद अस्थायी युद्धविराम व्यवस्था अब भी प्रभावी है और अमेरिका उसे बनाए रखने के प्रयास जारी रखे हुए है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय