सूरदा माइंस के मजदूरों ने खोला मोर्चा, श्रमिक अधिकारों की अनदेखी का लगाया आरोप
पूर्वी सिंहभूम, 07 जून (हि.स.)। पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित सूरदा माइंस में कार्यरत मजदूरों ने संवेदक कंपनी आरके इंटरप्राइजेज रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ श्रमिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आंदोलन का संकेत दिया है। रविवार को
सूरदा माइंस के मजदूरों द्वारा आंदोलन की तैयारी के लिए नाराबाजी करते


पूर्वी सिंहभूम, 07 जून (हि.स.)। पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित सूरदा माइंस में कार्यरत मजदूरों ने संवेदक कंपनी आरके इंटरप्राइजेज रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ श्रमिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आंदोलन का संकेत दिया है। रविवार को आयोजित एक बैठक में बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हुए, जहां मजदूरों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

बैठक में श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की सूरदा माइंस में संवेदक कंपनी के अधीन लगभग 950 श्रमिक कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम मजदूरी, समुचित चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा उपकरण, दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजा, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और अन्य वैधानिक सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

श्रमिकों ने कहा कि वे लंबे समय से इन मुद्दों को लेकर कंपनी प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इसके कारण मजदूरों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि खदान जैसे जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिक कल्याण से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है।

बैठक में प्रमुख रूप से मजदूर नेता एवं आंदोलनकारी बागराई मार्डी मौजूद थे। श्रमिकों ने सर्वसम्मति से उन्हें आंदोलन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी। इस दौरान मजदूरों ने अपनी समस्याओं और कार्यस्थल से जुड़े मुद्दों को विस्तार से रखा तथा सामूहिक रूप से अधिकारों की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।

बागराई मार्डी ने इस मौके पर कहा कि मजदूरों की जायज मांगों को लेकर जल्द ही कंपनी प्रबंधन के साथ वार्ता की जाएगी। श्रमिकों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन यदि प्रबंधन सकारात्मक पहल नहीं करता है तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मजदूरों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर व्यापक और उग्र रूप भी दिया जा सकता है। उन्होंने श्रमिकों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

बैठक में उपस्थित मजदूरों ने भी चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। श्रमिकों का कहना है कि वे सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां और कानून के तहत मिलने वाले अधिकार चाहते हैं, जिन्हें सुनिश्चित करना कंपनी और प्रबंधन की जिम्मेदारी है।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक