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मुंबई,07 जून (हि.स.)। पिछले कई सालों से अमेरिका में गणेश भक्तों के घरों और पब्लिक सर्कल में ईको-फ्रेंडली बप्पा समुद्र पार स्थापित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में इस साल भी, आस्था और पर्यावरण बचाने का संदेश देने वाली प्रथमेश इको-फ्रेंडली आर्ट की बनाई 50 ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां टेक्सास समेत अमेरिका के अलग-अलग शहरों में भेजी गई हैं। खास बात यह है कि इस शिपमेंट में साढ़े छह फुट ऊंची एक बड़ी गणेश मूर्ति भी शामिल है।
पर्यारणविद डॉ प्रशांत रवीन्द्र सिनकर ने इस संदर्भ में बताया कि विदेश में बसे भारतीयों के लिए गणेशोत्सव सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि एक अहम त्योहार है जो उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ता है। इसलिए, बप्पा के आने से लेकर उनके विसर्जन तक का त्योहार उतनी ही श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है। पिछले कुछ सालों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ, विदेशों में गणेश भक्तों की ओर से इको-फ्रेंडली मूर्तियों की भारी मांग बढ़ी है।
कुर्ला के प्रथमेश ईको-फ्रेंडली आर्ट में बनने वाली ये मूर्तियां पेपर पल्प से बनती हैं। मूर्तियों को बनाने में करीब 60 परसेंट पेपर, 30 परसेंट ग्लू और 10 परसेंट गुजरात से लाई गई खास सफेद मिट्टी का इस्तेमाल होता है। यह मिक्सचर मूर्तियों को हल्का, आकर्षक और इको-फ्रेंडली बनाता है। विसर्जन के बाद ये आसानी से घुल जाती हैं और पर्यावरण पर कोई बुरा असर नहीं डालतीं।
ईको- फ्रेंडली आर्ट के विशेषज्ञ संदीप गजकोश का कहना है-बप्पा सिर्फ आस्था की पहचान ही नहीं हैं, बल्कि अब वे पर्यावरण प्रेम का संदेश भी दे रहे हैं। दुनिया भर के गणेश भक्त मूर्तियां चुनते समय पर्यावरण के अनुकूलता को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले कई सालों से हम इको-फ्रेंडली मूर्तियां विदेश भेज रहे हैं। इस साल भी मूर्तियां गणेश भक्तों तक समय पर और सुरक्षित पहुंचें, इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा