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प्रयागराज, 07 जून (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अमरोहा के एक हत्याकांड मामले में ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह डीएनए रिपोर्ट की मांग वाली अर्जी पर पहले सुनवाई करे, उसके बाद ही आगे की कार्यवाही करे।
जिला अमरोहा के थाना गजरौला में वर्ष 2015 में दर्ज केस क्राइम संख्या 332/2015 में अभियुक्त इफ्तेखार खान पर धारा 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 201 (साक्ष्य मिटाना) आईपीसी के तहत मुकदमा चल रहा है। मामला एक अज्ञात शव की पहचान से जुड़ा है। अभियुक्त का कहना है कि उसे झूठा फंसाया गया है।
जांच के दौरान मृतक के परिजनों ने स्वयं डीएनए जांच की मांग की थी, लेकिन विवेचक ने न तो डीएनए रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में पेश की और न ही यह स्पष्ट किया कि जांच हुई भी या नहीं। इस पर अभियुक्त ने 25 मार्च 2026 को अपर जिला जज, अमरोहा की अदालत में धारा 91 सीआरपीसी/94 बीएनएसएस के तहत अर्जी दाखिल कर डीएनए व एफएसएल रिपोर्ट पेश कराने की मांग की।
ट्रायल कोर्ट ने इस अर्जी पर विचार को बचाव पक्ष के साक्ष्य के चरण तक टाल दिया, जिसे अभियुक्त ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की पीठ ने ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए कहा कि धारा 91 सीआरपीसी के तहत अर्जी पर विचार का कोई निश्चित चरण नहीं होता। यह मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। चूंकि डीएनए परीक्षण इस मामले के मूल विवाद से सीधे जुड़ा है, इसलिए इस अर्जी को टालना उचित नहीं था।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो माह के भीतर अर्जी पर अभियोजन पक्ष को सुनवाई का मौका देकर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे