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गुवाहाटी, 07 जून, (हि.स.)। पत्रकारिता में गलतियों से भी बड़ा खतरा अर्धसत्य के प्रकाशन और उसकी व्याख्या में निहित है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी दिल्ली दूरदर्शन केंद्र के वरिष्ठ सलाहकार एवं पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव ने रविवार को विश्व संवाद केंद्र असम द्वारा आयोजित देवर्षि नारद जयंती समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में वक्तव्य देते हुए की।
गुवाहाटी के बरबारी स्थित सुदर्शनालय में आयोजित समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं ईशान दर्पण के संपादक नव ठाकुरिया को इस वर्ष का प्रतिष्ठित देवर्षि नारद पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्यज्योति गोहाईं, चीफ रिपोर्टर रंजिता राभा तथा एक अखबार के उप संपादक मृदुल हालोई को विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में प्रखर श्रीवास्तव ने समकालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों तथा इतिहास से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में तथ्यों की शुद्धता और संदर्भ की समझ अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने विभाजन काल में संघ की भूमिका तथा उस समय मीडिया की दृष्टि पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने स्वतंत्रता और विभाजन के दौर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों तथा तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को समग्रता में देखने की आवश्यकता है। महात्मा गांधी की हत्या के बाद की परिस्थितियों और सावरकर परिवार के साथ हुए व्यवहार का भी उन्होंने संदर्भ दिया।
असम में प्रव्रजन, जनसांख्यिकीय परिवर्तन तथा राज्य के राजनीतिक इतिहास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इतिहास और वर्तमान को समझने के लिए तथ्यों का निष्पक्ष अध्ययन आवश्यक है।
समारोह में नव ठाकुरिया को 50 हजार की नगद राशि, चेलेंग, मानपत्र, भारत माता का चित्र तथा पुस्तकों का संकलन प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए ठाकुरिया ने कहा कि देवर्षि नारद की प्रश्न पूछने और मार्गदर्शन देने की परंपरा आज भी पत्रकारिता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक दृष्टिकोण आधारित पत्रकारिता की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्व संवाद केंद्र असम के संपादक किशोर शिवम के स्वागत वक्तव्य से हुई। उन्होंने देवर्षि नारद के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौरांग शर्मा ने भी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर एक स्मारिका का लोकार्पण किया गया तथा त्रिवेणी बुजरबरुवा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
नव बुजरबरुवा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम का समापन गुरु प्रसाद मेधी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए 300 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश