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रांची, 05 जून (हि.स.)।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही महागठबंधन के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा की सीटों के बंटवारे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। गठबंधन की रणनीति और उम्मीदवार चयन को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने शुक्रवार को दो टूक कहा कि महागठबंधन केवल चुनावी गणित का विषय नहीं है, बल्कि इसमें सहयोगी दलों के सम्मान, आपसी विश्वास और संवाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि झारखंड की राजनीति में झामुमो की भूमिका सबसे अहम रही है, इसलिए राज्यसभा की दोनों सीटों पर पार्टी अपनी दावेदारी को स्वाभाविक मानती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी उम्मीदवार की घोषणा से पहले गठबंधन सहयोगियों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी।
दरअसल, कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस के इस फैसले के बाद झामुमो खेमे में असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि गठबंधन स्तर पर अंतिम सहमति बनने से पहले प्रत्याशी की घोषणा करना राजनीतिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं है।
इधर कांग्रेस ने भी अपने विधायकों की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर समर्थन जुटाने के साथ-साथ गठबंधन के भीतर उत्पन्न स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar