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रांची, 05 जून (हि.स.)। डोरंडा स्थित शौर्य सभागार में शुक्रवार को नशे के खिलाफ दो दिवसीय विशेष जागरूकता सह मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य बढ़ती नशाखोरी के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा नशा पीड़ितों को उपचार और पुनर्वास के प्रति प्रेरित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के सैफ उमर ने युवा नशे से दूर रहें और समाज में इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करें। मादक पदार्थों का सेवन व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए गंभीर सामाजिक एवं आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। उन्होंने बताया कि समय पर काउंसलिंग और उपचार से नशे की लत से मुक्ति संभव है।
केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) के डॉ. संजय कुमार मुंडा ने कहा कि तनाव, करियर की चिंता, सामाजिक उपेक्षा और पारिवारिक समस्याओं के कारण युवा नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने इसे नशामुक्त समाज की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
रिनपास के मनोचिकित्सक डॉ. सजल अशीष नाग ने बताया कि नशा पीड़ितों के लिए रिनपास में 50 बेड की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है, जबकि सीआईपी में भी 50 बेड की व्यवस्था है। कार्यक्रम में झारखंड में बढ़ते नशीले पदार्थों के सेवन पर चिंता जताई गई तथा इसके नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया गया। मौके पर पुलिस, प्रशासन, सीआईपी और रिनपास के अधिकारी एवं चिकित्सक मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar