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नैनीताल, 29 जून (हि.स.)। उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सरकारी विभागों में उपनल संस्था के अलावा अन्य एजेंसियों के माध्यम से सेवा दे रहे कर्मचारियों को राज्य सरकार की ओर से वर्गभेद कर दो भागों विभाजित किए जाने और उन्हें पूर्व में दिए गए प्रोत्साहन राशि की वसूली करने को लेकर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को वन विभाग राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक को दस दिन के भीतर प्रत्यावेदन देने व वन विभाग राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक को उस प्रत्यावेदन पर तीन माह के भीतर विधि अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रत्यावेदन के विचाराधीन होने तक कर्मचारियों से कोई रिकवरी नहीं की जाए।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर पंकज, मोहित सहित कई अन्य कर्मचारियों ने उच्च उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य बनने के बाद राजकीय सेवाओं का संचालन करने के लिए पहले उन्हें 2014 और 2016 में बाह्य एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किया गया था। उसके बाद अन्य एजेंसी के माध्यम से उन्हें सेवा विस्तार दिया गया। वर्ष 2019 से उन्हें उपनल कर्मचारी माना गया तब से अब तक वे विभाग में कार्यरत है। याचिका में कहा कि अब सरकार उनसे कह रही है कि उनकी नियुक्ति उपनल से नहीं हुई है, बल्कि और अन्य एजेंसी के माध्यम से हुई है। इसलिए उनको पूर्व से अब तक दी गई सेवाओं की प्रोत्साहन राशि की रिकवरी की जाती है। याचिकाकर्ता की ओर से इस पर रोक लगाने की मांग की थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता