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कोलकाता, 29 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े कानूनों में संशोधन करने वाले दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर दिया। इस दौरान ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विपक्ष के साथ-साथ ममता बनर्जी गुट के विधायकों ने भी सदन से वॉकआउट किया।
मतदान के दौरान कुल 186 विधायकों ने विधेयकों के पक्ष में वोट दिया, जबकि 17 विधायकों ने विरोध में मतदान किया। इसके अलावा छह सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाए रखी।
इन विधेयकों के पारित होने के साथ ही राज्य में ओबीसी आरक्षण की संरचना को 17 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है। यह संशोधन कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बताया जा रहा है। इसके साथ ही ओबीसी श्रेणियों का पुनर्गठन भी किया गया है।
विधानसभा में पेश किए गए इन विधेयकों में पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और जनजाति को छोड़कर) सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण संशोधन विधेयक, 2026 तथा पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन विधेयक, 2026 शामिल हैं। इन दोनों विधेयकों को पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरिशंकर घोष ने सदन में पेश किया।
दूसरे विधेयक के जरिए 1993 के उस कानून में संशोधन किया गया है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन और संचालन होता है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव उच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में किए गए हैं और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।
दाेनाें विधेयक को पेश करते हुए मंत्री गौरिशंकर घोष ने कहा कि पहले बिना किसी विस्तृत फील्ड सर्वे के 113 जातियों को सूची में शामिल किया गया था, जिन्हें अब हटाया गया है, जबकि विभिन्न सर्वे के आधार पर शामिल 66 उप-श्रेणियों को बनाए रखा गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग अब यह जांच करेगा कि किन समुदायों को सूची में शामिल किया जाना चाहिए और वह अपनी सिफारिश राज्य सरकार को भेजेगा। मंत्री के अनुसार पिछली सरकार ने आयोग को दरकिनार किया था, जिसके कारण उच्च न्यायालय ने उस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया।
संशोधन के बाद राज्य सरकार को आयोग के साथ परामर्श कर विभिन्न ओबीसी श्रेणियों के लिए आरक्षण प्रतिशत तय करने का अधिकार भी मिल गया है। दूसरे विधेयक में आयोग की संरचना, शक्तियों और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर