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अम्बिकापुर, 29 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंतर्गत अम्बिकापुर में जनजातीय गौरव, संघर्ष और अधिकारों को रेखांकित करता एक भव्य दो दिवसीय आयोजन होने जा रहा है।
आदिम जाति विकास विभाग द्वारा भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती और ऐतिहासिक हुल क्रांति दिवस के उपलक्ष्य में 30 जून और एक जुलाई को इस विशेष कार्यक्रम का ताना-बाना बुना गया है। इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा शिरकत करेंगी, जो जनजातीय समाज की आवाज को मजबूती देने के लिए इस मंच पर मौजूद रहेंगी।
इस दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत 30 जून को दोपहर 3:00 बजे से होगी। स्थानीय पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में शाम 5:00 बजे तक चलने वाले इस प्रथम सत्र में भगवान बिरसा मुण्डा और अमर शहीद सिद्धू-कान्हू के जीवन, उनके ऐतिहासिक संघर्षों तथा आदिवासी समाज के उत्थान में उनके अमूल्य योगदान पर गहरा मंथन होगा। इस दौरान प्रबुद्ध जन व्याख्यान, विचार-विमर्श और संवाद के माध्यम से इतिहास के उन पन्नों को जीवंत करेंगे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और जनजातीय अधिकारों की नींव रखी।
आयोजन के दूसरे दिन, यानी एक जुलाई को कार्यक्रम का केंद्र बिंदु सर्किट हाउस रहेगा। यहाँ सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र का आयोजन किया जाएगा। इस सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा सीधे जनजातीय समुदाय के प्रमुखों और प्रतिनिधियों से रूबरू होंगी। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के सामने आ रही मौजूदा चुनौतियों, उनकी समस्याओं और विभिन्न समसामयिक विषयों पर सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि उनकी जमीनी समस्याओं के व्यावहारिक और प्रभावी समाधान तलाशे जा सकें।
आदिम जाति विकास विभाग के अनुसार, इस पूरे आयोजन का मूल उद्देश्य भगवान बिरसा मुण्डा और सिद्धू-कान्हू के महान आदर्शों व बलिदान की गाथा को जन-जन तक पहुँचाना है। विभाग का मानना है कि ऐसे आयोजनों से जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए एक सार्थक और सकारात्मक माहौल तैयार होगा। इस ऐतिहासिक और वैचारिक समागम को सफल बनाने के लिए आदिम जाति विकास विभाग ने क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों, जनजातीय समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, छात्र-छात्राओं और आम जनता से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की भावपूर्ण अपील की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह