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लखनऊ , 29 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने साेमवार काे ऑनलाइन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किए गए नवाचार के प्रयास और उससे उपजे भ्रम को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया कि 4 जून 2026 को जारी शासनादेश, जो सरकारी संस्थाओं से प्रॉपर्टी खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से था, उसे फिलहाल निरस्त कर दिया गया है।
उन्हाेंने बताया कि इस शासनादेश के पीछे का विचार यह था कि यदि विक्रेता कोई सरकारी संस्था (जैसे एलडीए, वीडीए) है, तो प्राधिकरण कार्यालय में ही स्टांप वेंडर स्टांप उपलब्ध कराएगा और डीड तैयार होने के बाद, सभी दस्तावेज वहीं से मेल के माध्यम से रजिस्ट्री कार्यालय को भेजे जाएंगे। रजिस्ट्री कार्यालय से पुष्टि होने पर तुरंत प्रिंट निकल जाएगा।
हालांकि इस शासनादेश में स्पष्टता की कमी के कारण अधिवक्ताओं और डीड राइटरों में यह भ्रम फैल गया कि उनका रोजगार छीना जा रहा है। मंत्री रवींद्र जायसवाल ने जोर देकर कहा कि सरकार अधिवक्ताओं और डीड राइटरों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनका रोजगार छीनने का कोई इरादा नहीं है। भविष्य में विभाग सभी पक्षों से संवाद कर प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सरल बनाने का प्रयास करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह