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नई दिल्ली, 29 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार ने कहा कि वह जयपुर पोलो ग्राउंड के परिसर की केवल सीमा तय करेगी और वहां के टर्फ की खुदाई नहीं करेगी। केंद्र सरकार ने इस बात की सूचना दिल्ली उच्च न्यायालय को दी। जस्टिस विनोद कुमार की वेकेशन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई रोस्टर बेंच के समक्ष 01 जुलाई को करने का आदेश दिया।
याचिका इंडियन पोलो एसोसिएशन ने दायर की है। याचिका में जयपुर पोलो ग्राउंंड को खाली करने के आदेश को चुनौती दी गई है। इसके पहले इंडियन पोलो एसोसिएशन ने पटियाला हाउस कोर्ट में केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी थी। पटियाला हाउस कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया था, जिसके बाद इंडियन पोलो एसोसिएशन ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
सुनवाई के दौरान इंडियन पोलो एसोसिएशन की ओर से पेश वकील कीर्तिमान सिंह ने केंद्र सरकार के आदेश पर रोक लगने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के डेमोलिशन, खुदाई या जयपुर पोलो ग्राउंड में बदलाव करने से रोका जाए। उन्होंने कहा टर्फ की खुदाई करने की क्या जरुरत है। ये सौ साल पुराना टर्फ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर का है। वे पूरे टर्फ की खुदाई कर रहे हैं। वे इतनी जल्दबाजी में है कि हमारी अपील का कोई मतलब न रह जाए। तब केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने कहा कि केंद्र सरकार पोलो ग्राउंड पर कुछ नहीं करने जा रही है, सिवाय बगल के गोल्फ कोर्स के साथ सीमांकन के। हम सीमांकन के अलावा कुछ नहीं करेंगे।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील राजेश गोगना ने कहा कि जयपुर पोलो ग्राउंड के पास एयरफोर्स स्टेशन है, जिसकी वजह से ये राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जुड़ा हुआ मसला है। सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार रेस क्लब, जिमखाना क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड का अधिग्रहण करना चाहती है। सरकार ऐसा जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर करना चाहती है। तब कोर्ट ने कहा कि इस मसले पर विस्तृत सुनवाई की जरुरत है और उसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई एक जुलाई को नियमित रोस्टर के समक्ष लिस्ट करने का आदेश दिया।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रभात मिश्रा