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जबलपुर, 29 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने आईएएस अधिकारी एवं अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि याचिका में मांगी गई अधिकांश राहतें न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में नहीं आतीं। यह जनहित याचिका अधिवक्ता अभिषेक दुबे की ओर से दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित मामले में पहले से ही एफआईआर दर्ज है, इसलिए दोबारा एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार संबंधित एजेंसियां करेंगी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि 23 नवंबर 2025 को अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद संतोष वर्मा ने ब्राह्मण समाज के खिलाफ कथित रूप से जातिसूचक और भड़काऊ टिप्पणी की थी। याचिकाकर्ता ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई, विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा ब्राह्मण समाज के हित में विशेष दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की थी।
एनएसए लगाने की मांग पर कोर्ट ने कहा कि यह पूरी तरह प्रशासनिक अधिकारियों के विवेकाधिकार का विषय है और न्यायालय इस संबंध में कोई अनिवार्य आदेश जारी नहीं कर सकता। वहीं, विभागीय कार्रवाई की मांग भी अदालत ने तकनीकी आधार पर अस्वीकार कर दी, क्योंकि याचिका में केंद्र सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया था, जबकि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के विरुद्ध इस प्रकार की कार्रवाई में यह आवश्यक है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि संबंधित मामले में किसी वैधानिक या सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की आवश्यकता होगी, तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका में मांगी गई सभी राहतों को अस्वीकार करते हुए जनहित याचिका खारिज कर दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक