हाई कोर्ट ने अभिषेक के आवास पर पुलिस कार्रवाई के सभी वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का दिया आदेश
कोलकाता, 29 जून (हि.स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व लाेकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर 13 जून की तड़के की गई पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य ऑडियो वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखन
कलकत्ता हाई कोर्ट


कोलकाता, 29 जून (हि.स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व लाेकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर 13 जून की तड़के की गई पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य ऑडियो वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें तृणमूल कांग्रेस की ओर से पुलिस कार्रवाई की वैधता को चुनौती दी गई है।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने मामले में तत्काल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि वर्तमान चरण में अदालत केवल प्रारंभिक सुनवाई कर रही है और पुलिस कार्रवाई की वैधता ही मुख्य विवाद का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने आदेश दिया कि 13 जून को हुई तलाशी और जब्ती अभियान से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, पुलिस के पास मौजूद ऑडियो रिकॉर्ड और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए, ताकि मामले की अंतिम सुनवाई तक किसी भी प्रकार से सबूतों में बदलाव या नष्ट होने की आशंका न रहे।

यह याचिका उस पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर की गई है जो तड़के 13 जून को अभिषेक बनर्जी के आवास पर की गई थी। राज्य सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई उनके सहयोगी सुमित रॉय की तलाश में की गई थी, जो जमीन धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में आरोपित हैं। पुलिस का दावा है कि मोबाइल टावर लोकेशन के आधार पर यह संकेत मिले थे कि सुमित रॉय उस आवास में मौजूद हो सकते हैं।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत में कहा कि उनकी आपत्ति जांच प्रक्रिया पर नहीं है, बल्कि पुलिस द्वारा शक्ति के कथित दुरुपयोग पर है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी जांच के नाम पर देर रात या तड़के किसी के घर में प्रवेश कर तलाशी लेना कानून के दायरे में उचित नहीं ठहराया जा सकता, विशेषकर तब जब मामला मई, 2021 से जुड़े आरोपों से संबंधित हो।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने राज्य सरकार से सवाल किया कि कार्रवाई इतनी देर रात क्यों की गई। इस पर राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कहा कि यह पूरी तरह रात में की गई कार्रवाई नहीं थी और पुलिस लगातार दरवाजा खटखटाती रही थी।

राज्य पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि तलाशी के दौरान इस बात की आशंका थी कि संबंधित व्यक्ति फरार हो सकता है, इसलिए कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई। कहा कि यह कार्रवाई बीएनएसएस की धारा 44 के तहत की गई है और पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी।

दूसरी ओर याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आग्रह किया गया कि केवल सीसीटीवी ही नहीं, बल्कि पुलिस के पास मौजूद सभी अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग और ऑडियो रिकॉर्ड भी संरक्षित किए जाएं। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया।

राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया कि वह आगामी सुनवाई में घटना से जुड़े अतिरिक्त तथ्य अदालत के समक्ष रखेगी।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी के आवास के सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ पुलिस के पास उपलब्ध सभी ऑडियो वीडियो सामग्री अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखी जाए और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।

मामले में अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है, जिसके बाद राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करना होगा और उसके बाद दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल किया जाएगा।-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर