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सुपौल, 28 जून (हि.स.)।
जिले में बिना वैध पंजीकरण और नियमों की अनदेखी कर संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन ने जिले के नौ अल्ट्रासाउंड केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संबंधित संचालकों को निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण, नवीकरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एमबीबीएस चिकित्सकों की सहायता से गठित विशेष जांच टीम ने जिले के विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान कई संस्थानों में पंजीकरण संबंधी अनियमितताएं और नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए।
इसके बाद विभाग ने संबंधित संचालकों से स्पष्टीकरण मांगते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।सिविल सर्जन की ओर से जारी नोटिस में केंद्र संचालकों से छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। इनमें अल्ट्रासाउंड केंद्र के पंजीकरण का आवेदन, नवीकरण से जुड़े दस्तावेज, स्थान परिवर्तन की अनुमति और अन्य वैध कागजात शामिल हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति केंद्र का स्थान बदलने वाले संस्थानों पर भी कार्रवाई की जाएगी।नोटिस पाने वाले संस्थानों में ग्लोबल अल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक सेंटर, पी.एन. मेमोरियल अल्ट्रासाउंड क्लीनिक, प्रीत अल्ट्रासाउंड सेंटर, शंकर अल्ट्रासाउंड, राजा डायग्नोस्टिक, सनशाइन अल्ट्रासाउंड सेंटर, सूर्या डायग्नोस्टिक यूनिट, आराध्या अल्ट्रासाउंड सेंटर और लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर शामिल हैं।सिविल सर्जन ने कहा कि बिना पंजीकरण या नियमों का उल्लंघन कर संचालित किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र को बख्शा नहीं जाएगा।
सभी संस्थानों को पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा। निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित केंद्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह कार्रवाई जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभाग ने कहा है कि आगे भी ऐसे केंद्रों की नियमित जांच जारी रहेगी ताकि स्वास्थ्य सेवाएं कानून और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हों।पीसी-पीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) अधिनियम, 1994 के तहत बिना वैध पंजीकरण कोई भी अल्ट्रासाउंड या इमेजिंग सेंटर संचालित नहीं किया जा सकता। केंद्र का स्थान बदलने, मशीन स्थानांतरित करने या संचालन में बदलाव के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक है। साथ ही प्रत्येक केंद्र को पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना, निर्धारित रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और यह सूचना प्रदर्शित करना अनिवार्य है कि भ्रूण के लिंग की जांच एवं जानकारी देना कानूनन प्रतिबंधित है।
पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के तहत बिना पंजीकरण केंद्र चलाना, भ्रूण का लिंग बताना या इससे जुड़े नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध है। पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की जेल और 50 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर पांच वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा संबंधित केंद्र का पंजीकरण निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र