नशे के दलदल में फंसे युवाओं को ओएसटी ने उबारा, लौट रही जिंदगी की रौनक
बहराइच, 28 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच में स्थित महाराजा सुहेल देव स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में नशे की अंधेरी गलियों में राह तलाश रहे जिले के 958 इंजेक्टेबल ड्रग यूजर्स के लिए ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी) केंद्र नई
मरीज को दवा खिलाती स्टॉफ नर्स आशा शुक्ला


बहराइच, 28 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच में स्थित महाराजा सुहेल देव स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में नशे की अंधेरी गलियों में राह तलाश रहे जिले के 958 इंजेक्टेबल ड्रग यूजर्स के लिए ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी) केंद्र नई सुबह की किरण साबित हो रहा है। कभी स्मैक, हेरोइन और प्रतिबंधित दवाओं के आदी हो चुके सैकड़ों युवा और महिलाएं आज इस थेरेपी की मदद से न सिर्फ नशा छोड़ पा रहे हैं, बल्कि समाज की मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और ज़मीनी हकीकत पर नज़र डालें, तो काउंसलिंग और नियमित दवा के तालमेल ने सैकड़ों परिवारों को उजड़ने से बचा लिया है।

बहराइच के राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के इस ओएसटी सेन्टर में तैनात स्टॉफ नर्स आशा शुक्ला के मुताबिक, ओएसटी केंद्र पर आने वाले मरीजों को पहले मानसिक रूप से तैयार किया जाता है। इसके बाद उन्हें डॉक्टर की देखरेख में 'ब्यूप्रेनॉर्फिन' जैसी जीवन रक्षक दवाएं दी जाती हैं, जो धीरे-धीरे उनकी नशे की तलब को खत्म कर देती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय और मुफ्त होती है, जिससे युवाओं और महिलाओं का झिझकना भी कम हुआ है। इतना ही नहीं नशे की दुनिया में अपना सब कुछ तबाह कर चुके लोगों को यहां तैनात स्टॉफ नर्स स्वयं अपने हाथ से दवा खिलाती हैं।

हिन्दुस्थान समाचार की टीम ने जब इस केन्द्र की पड़ताल की तो यहां स्टॉफ नर्स आशा शुक्ला मिलीं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 100 से ज्यादा मरीजों को थेरेपी दी जाती है। उनका कहना है कि नशा मुक्ति के इस अभियान में अब समाज को भी अपनी सोच बदलनी होगी। जब तक हम नशा छोड़ने वाले युवाओं को अपनाएंगे नहीं, तब तक उनकी यह जंग अधूरी रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जिनका कोर्स कम्प्लीट हो जाता है,उन्हें यहां सम्मानित भी किया जाता है।

छूट गई इंजेक्शन की लत, अब करता हूँ एनजीओ में जॉब

शहर के व्यस्त बाजार में रहने वाले देवेश श्रीवास्तव की कहानी हर उस युवा के लिए मिसाल है जो नशे से जूझ रहा है। देवेश बताते हैं, कुछ साल पहले दोस्तों की संगत में इंजेक्शन से ड्रग लेने की ऐसी लत लगी कि मेरा सब कुछ बिखर गया। माँ-बाप की आंखों में सिर्फ आंसू थे। फिर किसी ने ओएसटी केंद्र के बारे में बताया। शुरुआत में डर था, लेकिन वहाँ के स्टॉफ ने अच्छी तरह संभाला। आज मैं पूरी तरह नशा मुक्त हूँ और गर्व से अपना काम कर रहा हूँ।

कैसे काम करती है ओएसटी थेरेपी

ओएसटी कोई चमत्कार नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक पद्धति है। यह थेरेपी नशीले पदार्थों की तीव्र इच्छा और न मिलने पर होने वाले दर्द को रोकती है। इस सेंटर में सुबह आठ बजे सायं चार बजे तक उपचार हाेता है। सामान्य पर्चा बनने के बाद राेगी का उपचार किया जाता है। अवकाश के दिनाें में सुबह आठ बओ से दाेपहर बारह बजे तक ही उपचार हाेता है।

अपराध और बीमारी पर लगाम

मादक पदार्थाें के आदी हाे चुके युवा नशा न मिलने पर अक्सर अपराध की राह चुनते हैं या एक ही सिरिंज से एचआईवी/हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का शिकार होते हैं। ऐसे युवाओं के लिए ओएसटी न केवल इन दोनों खतरों को खत्म करती है अपितु युवाओं काे भी उनके सुरक्षित जीवन काे आगेे बढ़ाने में मदद करती है।

हिन्दुस्थान समाचार / ANURAG GUPTA