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बगदाद/तेहरान, 28 जून (हि.स.)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को चेतावनी दी कि समुद्री व्यवस्थाओं में किसी भी बाहरी दखल से स्थिति जटिल होती जाएगी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की प्रक्रिया में देरी होगी।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम न्यूज़ के अनुसार, बगदाद में इराकी विदेश मंत्री फुआद हुसैन के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में अराघची ने जोर दिया कि ईरान के समुद्री प्रबंधन के फैसलों पर बाहरी दबाव या दखल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था थोपने की किसी भी कोशिश से केवल जटिलताएं पैदा होंगी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी होगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी इराक यात्रा खास और संवेदनशील संदर्भ में हो रही है, उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल के आक्रामक युद्ध के बाद पहली यात्रा बताया। उन्होंने हमलों की निंदा करने और इराकी सरकार व जनता द्वारा दिखाए गए मजबूत समर्थन के लिए इराक का आभार व्यक्त किया।
अराघची ने कहा कि उनकी यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्य थे: समर्थन के लिए इराक को धन्यवाद देना, नई इराकी सरकार को बधाई देना और पवित्र शहरों नजफ, कर्बला, समारा और काज़िमिया में इस्लामिक क्रांति के दिवंगत नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोहों से जुड़ी व्यवस्थाओं का समन्वय करना। उन्होंने बताया कि कई इराकी समूहों ने इसमें भाग लेने की इच्छा जताई है।
उन्होंने कहा कि बातचीत में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने जोर दिया कि ईरान-इराक के बीच कीमती रणनीतिक संबंध हैं और वे नई इराकी सरकार के तहत सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अराघची ने आगे कहा कि उन्होंने अपने इराकी समकक्ष को हाल की क्षेत्रीय घटनाओं के बारे में जानकारी दी, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लेबनान से संबंधित तनाव के साथ-साथ चल रही राजनयिक बातचीत भी शामिल है।
समुद्री व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने दोहराया कि आपसी समझ के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य 30 दिनों के भीतर ईरान के प्रबंधन में संकट-पूर्व की स्थिति में लौट आएगा और इस संबंध में किसी देश या संस्था की कोई जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन व्यवस्थाओं में दखल देने की किसी भी कोशिश से अस्थिरता और बढ़ेगी।
अराघची ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा बाहरी ताकतों को छोड़कर एक नए ढांचे पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान, फारस की खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों के साथ-साथ ईरान और इराक को शामिल करते हुए क्षेत्रीय बातचीत तंत्र के लिए इराक के प्रस्ताव का स्वागत करता है।
इराक के विदेश मंत्री फ़ुआद हुसैन ने ईरान-इराक संबंधों को ऐतिहासिक, भौगोलिक, धार्मिक और रणनीतिक बताते हुए किसी भी देश के खिलाफ़ युद्ध और आक्रामकता के विरोध पर ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि इराक ने पहले तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, लेकिन हाल की घटनाओं के कारण तनाव बढ़ गया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से इराक के तेल निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा।
हुसैन ने क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करने के लिए इराक के समर्थन को दोहराया और एक व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का प्रस्ताव रखा। उन्होंने फारस की खाड़ी के देशों, ईरान और इराक को शामिल करते हुए एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन का सुझाव दिया और ऐसी बैठक की मेजबानी करने के लिए बगदाद की तत्परता की पुष्टि की।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी