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शिमला, 25 जून (हि.स.)। शिमला जिले में सेब सीजन-2026 को सुचारू और सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में वीरवार को आयोजित समीक्षा बैठक में परिवहन, यातायात प्रबंधन, मालभाड़ा निर्धारण, श्रमिकों की उपलब्धता, नियंत्रण कक्षों की स्थापना और पैकेजिंग सामग्री जैसी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रशासन का लक्ष्य है कि सेब उत्पादकों और बागवानों को सीजन के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 के दौरान शिमला जिले में करीब 2.31 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने परिवहन व्यवस्था को लेकर विशेष रणनीति बनाई है। सभी एसडीएम अपने क्षेत्रों में बागवानों, ट्रक ऑपरेटरों और पिकअप यूनियनों के साथ बैठक कर वाहनों की आवश्यकता का आकलन करेंगे। जरूरत पड़ने पर बाहरी जिलों और राज्यों से भी ट्रकों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही तुड़ाई और ढुलाई के लिए पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
प्रशासन ने मालभाड़ा निर्धारण के लिए एसडीएम, डीएसपी, लोक निर्माण विभाग और एचआरटीसी प्रतिनिधियों की समिति गठित करने का निर्णय लिया है। परिवहन शुल्क बॉक्स के बजाय किलोग्राम या टन के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं 15 जुलाई तक फागू में मुख्य नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जहां से पूरे सीजन की निगरानी होगी। ट्रक चालकों और क्लीनरों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे तथा उनकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा।
सेब सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान लागू किया जाएगा। सेब से लदे ट्रकों को शिमला शहर में प्रवेश नहीं मिलेगा और उन्हें ढली-मेहली बाईपास से भेजा जाएगा। भट्टाकुफर मंडी में केवल नमूना बॉक्स लाने की अनुमति होगी, जबकि सेब से लदे वाहन सीधे आढ़तियों के गोदामों तक जाएंगे। इसके अलावा एचपीएमसी और हिमफेड को समय रहते पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा