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अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने हिंदी और साउथ भारतीय फिल्म उद्योग के बीच महिलाओं की स्थिति को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। एक हालिया साक्षात्कार में तमन्ना ने कहा कि बॉलीवुड अभिनेत्रियों को किरदार चुनने में अधिक स्वतंत्रता और विविध अवसर देता है, जबकि साउथ भारतीय सिनेमा के व्यावसायिक ढांचे में महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक सीमाएं देखने को मिलती हैं। उनका मानना है कि कुछ मामलों में साउथ भारतीय फिल्म उद्योग में अब भी पितृसत्तात्मक सोच का प्रभाव दिखाई देता है।
तमन्ना ने कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग कलाकारों को अपने करियर की दिशा तय करने की अधिक आजादी देता है। उनके अनुसार, बॉलीवुड में कलाकार चाहें, तो कलात्मक और गंभीर भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं या फिर पूरी तरह व्यावसायिक फिल्मों का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं साउथ भारतीय सिनेमा में अभिनेत्रियों से अभिनय के साथ-साथ ग्लैमर, नृत्य और व्यावसायिक अपेक्षाओं को भी समान रूप से निभाने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक वहां टिके रहने के लिए दोनों पहलुओं में संतुलन बनाना जरूरी होता है।
अभिनेत्री ने फिल्मों के डांस नंबर्स और तथाकथित 'आइटम सॉन्ग्स' पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ऐसे गीतों को केवल नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि वे मनोरंजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और कई बार फिल्मों से अधिक लोकप्रिय हो जाते हैं। तमन्ना ने करीना कपूर और कैटरीना कैफ जैसी अभिनेत्रियों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई डांस नंबर समय के साथ सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन जाते हैं। उनके बयान के बाद फिल्म उद्योग में महिलाओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश चंद्र दुबे