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मुंबई, 21 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र में विपक्ष महाविकास अघाड़ी (मविआ) ने रविवार को विधानसभा सत्र से पहले राज्य सरकार की आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार करने की घोषणा की है। इसके लिए विपक्षी दलों ने जनता के ज़रूरी मुद्दों पर प्रशासन की विफलता और असंवेदनशील रवैये का हवाला दिया।
महाराष्ट्र विधानमंडल का वर्षाकालीन अधिवेशन सोमवार से शुरु हो रहा है। इसके एक दिन पहले अर्थात रविवार को महाविकास आघाड़ी के विपक्षी नेताओं ने मुंबई में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सत्ताधारी महायुति सरकार पर राज्य की गंभीर समस्याओं को नजऱअंदाज़ करने का आरोप लगाया है। इन समस्याओं में कृषि संकट, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और नशीले पदार्थों का बढ़ता नेटवर्क शामिल है।
शिवसेना (यूबीटी) समूह के नेता भास्कर जाधव ने आज पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मांग की कि सरकार राज्य में सूखा घोषित करे। जाधव ने कहा, सरकार द्वारा घोषित कर्ज़ माफ़ी योजना धोखा है, क्योंकि किसानों को जटिल शर्तों और नियमों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष कृषि ऋणों की पूरी माफ़ी की मांग करता है।
कांग्रेस विधान परिषद समूह के नेता सतेज पाटिल ने तीखा हमला करते हुए मौजूदा सरकार को 56 प्रतिशत कमीशन वाली सरकार करार दिया। पाटिल ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों को अपने बिल पास करवाने के लिए भारी कमीशन देने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने कहा, ठेकेदारों के 1 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के बिल लंबित हैं। इसके अलावा फंड में कटौती के कारण जल जीवन मिशन के तहत विकास कार्य रुक गए हैं और राज्य पर कर्ज़ का बोझ बढक़र 9.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिससे वित्तीय स्थिति नाज़ुक हो गई है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता जयंत पाटिल ने राज्य में कानून-व्यवस्था के बिगडऩे का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों में भारी बढाेत्तरी हुई है। छोटे-मोटे तस्कर तो पकड़े जाते हैं, लेकिन 'मास्टरमाइंड' आज़ाद घूमते हैं। ऐसा लगता है कि ड्रग तस्करों और पुलिस के बीच मिलीभगत है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले सत्र के दौरान उठाए गए मंदिर की ज़मीन के घोटाले पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जितेंद्र आव्हाड ने विपक्ष की चिंताओं को दूर करने के बजाय उनका मज़ाक उड़ाने के लिए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हमारे ज्ञापन में उठाए गए हर मुद्दे का जवाब दे, न कि हमारे पत्रों की व्याकरण पर टिप्पणी करे। विपक्षी नेताओं ने कहा कि ऐसी सरकार के साथ चाय पार्टी में शामिल होना ठीक नहीं होगा जो राज्य के 13 करोड़ नागरिकों पर असर डालने वाले मुद्दों पर चर्चा करने को तैयार नहीं है। विपक्ष ने राज्य विधानसभा के आने वाले मॉनसून सत्र के दौरान इन मुद्दों को ज़ोर-शोर से उठाने का संकल्प लिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव